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हर किसी के नयन में पानी है।
कैसी ख़ुशियों की राजधानी है?
लोग कहते जिसे ख़ुदी, वह तो।
छल-पफ़रेबों की राजधानी हैं?
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भोगते हम जिसे, वो आ८ाादी।
दासता से भरी कहानी है।
रूढ़ियों का तिलिस्म टूटेगा,
आपको चोट-भर लगानी है।
हाथ पीले करो, बिदाई दो,
वासना हो गई सयानी है।
प्यार से जिसका पड़ गया पाला,
आ गई उसको याद नानी है।
देखकर आदमी का विष 'नीरद'
साँप का ८ाह्र पानी-पानी है।
कर ले शातिर अपने दिल को।
हल करना हो ग़र मुश्किल को।
पूजे हैं दुनिया जाहिल को।
ठोकर मारे जग क़ाबिल को।
हश्र ८ामाने का क्या होगा?
मान ख़ुदा बैठा बातिल को।
हाकिम, मुंसिपफ़ जिसके मुहापिफ़ज,
कौन स८ाा दे उस क़ातिल को?
किसने जानी दिल की पिफ़तरत?
पल में ताड़ करे है तिल को।
उस महपिफ़ल पर लानत भेजो,
जो जाँबा८ा कहे बु८ादिल को।
'नीरद' तेरी राह ग़लत है।
कोस रहा है क्यों मं८िाल को? |