दिसम्बर २०१०
 
 
 
   
 
 
 
• मनीषा कुलश्रेष्ठ को 'लमही सम्मान' • निदा फाजली को पद्मश्री सम्मान •देवेंद्र इस्सर नहीं रहे• ओड़िया लेखिका प्रतिभा रॉय को २०११ का ज्ञानपीठ पुरस्कार•चंद्रकांत देवताले को साहित्य अकादमी पुरस्कार • कुणाल सिंह को युवा साहित्य अकादमी सम्मान • तीसरा 'कृष्ण प्रताप कथा सम्मान' (२०१२) गीतांजलिश्री की कृति 'यहां हाथी रहते थे' को • रविशंकर को मरणोपरांत लाइफटाइम अचीवमेंट ग्रैमी पुरस्कार • विनोद कुमार शुक्ल को हिन्दी काव्य साहित्य में रचनात्मक योगदान के लिए 'परिवार' पुरस्कार • वरिष्ठ साहित्यकार कामतानाथ नहीं रहे
 
 
 
ब्लॉगनामा
चोरी और सीनाजोरी
प्रतिभा कुशवाहा


मेरे हिसाब से अगर हम किसी अन्य लेखक की कोई कहानी या लेख पढ़ते है और वो हमें किसी भी कोण से कमजोर लगती है या ऐसा लगता है कि उस लेखक ने विषय के साथ न्याय नहीं किया है और हमारे पास कोई साध्न भी नहीं है उस लेखक तक अपने विचारों को पहुंचाने का तो मेरे खयाल से अगर हम उसी विषय को आधर बनाकर नए सिरे से किसी कहानी या लेख को लिखे तो ये जायज है और इसे किसी भी कीमत पर साहित्यिक बेईमानी नहीं कहा जा सकता क्योंकि हर लेखक कहीं ना कहीं से प्रेरित होकर ही ;चाहे वो अपने आसपास के माहौल से प्रेरित हो अथवा समाज में चल रही बातों सेद्ध अपनी कहानी या लेख को लिखता है। हाँ! अगर उसी पुरानी कहानी या लेख को ज्यों का त्यों सिपर्फ लेखक का नाम बदलकर या पात्राों के नाम, लिंग, स्थान बदलकर पिफर से परोस दिया जाता है तो ये सरासर बेईमानी है, धेखा है, प्रफाड है उस लेखक के साथ।' उपयुक्त बातें ब्लॉगर राजीव तनेजा ने साहित्यकार तेजेन्द्र शर्मा को लिखी। जिनकी चार रचनाएं उनके ब्लॉग ;ींदेजमतंीवण्इसवहेचवजण्बवउद्ध से हालपिफलहाल में चोरी कर ली गयी है। तेजेंद्र जी ने इस द्घटना को गंभीरता से लेते हुए आभासी दुनिया में इस द्घटना को उठाया। इसी संदर्भ में उपर्युक्त मेलनुमा उद्गार राजीव तनेजा ने तेजेन्द्र शर्मा को लिख भेजे।
गूगल सर्च के दौरान राजीव तनेजा को इस चोरी का पता चला तो उन्होंने तुरंत इस पर अपना विरोध् दर्ज किया। कुछ ;चोरोंद्ध ने इस संदर्भ में अपनी गलती स्वीकारते हुए मापफी मांगी और रचनाकार का नाम दे दिया। ऐसा नहीं है कि राजीव तनेजा पहले ऐसे ब्लॉगर हैं जिनके ब्लॉग से रचित सामग्री चोरी की गयी। वास्तव में हिन्दी ब्लॉग की लोकप्रियता के साथ ही यह सिलसिला चल पड़ा है। इसी तरह जागरण जंक्शन डॉट काम से अदिति कैलाश की रचना जब उनके ब्लॉग से चोरी हुयी तो उन्होंने बहुत ही दुख और क्षोभ के साथ लिखा कि अगर आपको किसी की कोई पोस्ट अच्छी लगती है तो ये एक अच्छी बात है। आप चाहते हैं कि वो अच्छी पोस्ट और भी ज्यादा लोग पढे़ तो वो और भी अच्छी बात है। पर उसे अपने नाम के साथ पोस्ट कर देना कहाँ की ईमानदारी है।' अदिति का यह वक्तव्य एक रचनाकार की पीड़ा को बताता है।
बहुत से रचनाकारों का मानना है कि उनकी रचना किसी की रचना से प्रेरित या प्रभावित हो सकती है। किसी से या किसी की रचना से प्रेरणा लेना बुरा नहीं है अगर उसका गलत प्रयोग न किया जाए। किसी से प्ररेणा लेकर रचना करना भी एक मेहनत भरा काम है, उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए। लेकिन यहाँ मामला 'कॉपी पेस्ट' का है। वास्तव में यह प्रवृत्ति ब्लॉग जगत में तुरत-पफुरत लेखक या रचनाकार बनने और वाहवाही लूटने का तर्जुमान है। तकनीकी ने इस प्रक्रिया को इतना आसान कर दिया है कि शैतानी दिमाग में ऐसे कर्म उकसने लगते हैं और इस तरह की चोरियां की जाती हैं।
ब्लॉग की इस बीमारी के लिए कुछ तकनीकी इलाज है। उदाहरण के तौर पर आप अपने ब्लॉग पर कॉपी पेस्ट डिसेबल कर सकते हैं, कुछ गैजेट है जो ब्लॉग से मैटेरियल की चोरी नहीं होने देते। कॉपी स्कैप ;ूूूण्बवचलेबंचमण्बवउद्ध एक हद तक इस प्रकार की चोरी में मदद कर सकता है। पर लेखकीय का शौक पाले इन छद्म रचनाकारों के लिए यह नाकापफी है। ब्लॉग की संपूर्ण सामग्री कॉपी राइट कानून के अंतगर्त आती है। लेकिन शौकियातौर से अपनाये गये हिन्दी ब्लॉग लेखन के लिए यह गैरजरूरी है। उदासीनता भी एक बड़ा कारण है। हिन्दी ब्लॉग का यहाँ इतना मजबूत तंत्रा नहीं है कि ऐसी किसी चोरी के लिए कानूनी पचड़ों में पड़ा जाए। इस स्थिति में जो उपाय किया जा सकता है वह है सभी ब्लॉगरों द्वारा चोर ब्लॉगर की भर्त्सना। उसकी पोस्ट पर जाकर जमकर लताड़ लगायें और मेल के जरिए एक अद्घोषित यु( छेड़ दें जिससे पुनः वह चौर्य कर्म का साहस न कर सके। उन्हें बताया जाना चाहिए कि अगर वो किसी और की पोस्ट को अपने ब्लॉग में लगा रहे हैं तो उनका कर्तव्य है कि वे वास्तविक रचनाकार का नामोल्लेख अवश्य करें। रचनाकार का हक उन्हें सम्मानपूर्वक दे। किसी की मेहनत पर इस तरह पानी पफेरकर सम्मान लेना एक बड़ी क्षुद्रता है।

 
 
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