| इमरोज |
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खास
वह एक खास लड़की थी
मेरे साथ आर्ट स्कूल में पढ़ती थी
क्लास की और लड़कियों में बैठी भी
वह हमेशा खास लगती थी...
आप वो पफूल जैसी थी
और उसकी पसंद खुशबू जैसी थी
कपड़े वह हलके रंग के ही पहनती थी
और पेंट भी हलके रंगों से करती थी
जिसके साथ भी बोलती
सदा मध्यम सुरों में ही बोलती थी...
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एक दिन सारी क्लास को पफूल पेंट
करने के लिए कहा गया
सबने कई कई पफूल कई कई रंगों में बनाए
पर उस लड़की ने
सारे कागज पर
एक ही पफूल बनाया एक लम्बी डंडी पर
और हलके हलके रंगों में
लंच का वक्त हो गया
सारी क्लास लंच के लिए चली गई
पर मैं नहीं गया
मैं उस एक पफूल पेंट करने वाली को सोच रहा था
उसकी सीट पर बैठकर
उस एक पफूल को देखता भी रहा
और उस लड़की को सोचता भी
पता नहीं मेरी सोच ने कब
उस पफूल के नीचे सैल्पफ पोट्रेट लिख दिया
वह आ गयी उसने मुझे सीट से उठते हुए देख लिया था
उसने आकर अपने पफूल को भी देखा
और उसके नीचे लिखा सैल्पफ पोट्रेट को भी पढ़ा
ये पढ़कर वो मुस्कराती
मेरे सामने आकर खड़ी हो गयी
और बोली
तेरी खूबसूरत ड्रोइंग्स तो मैं रोज देखती हूँ
तुझे और तेरी सोच को मैंने आज ही देखा है
मैंने तो सिपर्फ पफूल बनाया था
तूने उसको मेरी सेल्पफ पोट्रेट बना कर
इसको खास बना दिया है
तेरा और तेरी सोच का शुक्रिया
मैं तुझे याद करके भी
शुक्रिया करती रहूँगी...
मेरा एक सतर का
पाठ भी अरदास भी
कि वो
सदा पफूल की तरह
खिलती रहे
महकती रहे... |
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| रास्ते |
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सब रास्ते जागते के
पीछे-पीछे चलते हैं
और
सोये हुए रास्तों के
पीछे-पीछे...
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| हमसपफर |
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८िांदगी असीम है
म८ाहब सीमित
सीमित असीम का हमसपफर
नहीं हो सकता... |
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रंग |
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जब माँ नहीं होती
किसी भी रिश्ते में
द्घर नहीं रहता
और
जब सोहनी नहीं होती
८िांदगी के किसी भी रंग में
रंग ही नहीं रहता... |
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| धरम |
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जो आपके सुबहों के साथ
चलता है
सिपर्फ वही धरम है...
देश का १५ अगस्त हर साल आ जाता है
पर ना मर्द का १५ अगस्त आ रहा है,
ना औरत का
पता नहीं किस जगह रुका हुआ है
उनके अन्दर कि उनके बाहर |
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| पाठ |
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हर ग्रंथ तह८ाीब का
बन्दे को लिखा
एक वादा है
जिसका बन्दा रोज
पाठ करता रहता है...
बन्दे का पाठ
आज भी जारी है
पर वादा
अभी तक पूरा नहीं हुआ...
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| डर |
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हर म८ाहब डर पैदा करता है
और डर को धर्म का कोई पफूल
कभी नहीं लगता... |
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| किस्मत |
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प्यार अपनी किस्मत
आप लिखता है
और बाकी लोगों की
किस्मत कोई और
लिखता है... |
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