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दिसम्बर २००९
 
 
 
   
 
 
 
•अमरकांत को इलाहाबाद में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित• जितेन्द्र श्रीवास्तव को देवीशंकर अवस्थी सम्मान•दिल्ली में विश्व (पुस्तक मेला ;राजकमल प्रकाशन के स्थापना दिवस पर तीन लखटिया पुरस्कारों की द्घोषणामहुआ माजी के उपन्यास 'मरंग गोड़ नीलकंठ हुआ' को तीसरा राजकमल कृति सम्मानविश्वनाथ त्रिापाठी की पुस्तक 'व्योमकेश दरवेश' को पहला सृजनात्मक गद्य सम्मान अमरेन्दु किशोर की कृति 'बादलों के रंग हवाओं के संग' को चौथा कृति सम्मानस्तंभ लेखक भारत भारद्वाज के खिलापफ वारंटद्ध)
 
 
 
प्रभाष जोशी पर विशेष
अंनत आकाश में प्रकाश स्तंभ
प्रभाष जोशी ने हिन्दी पत्राकारिता को नई चाल में ढाला। शास्त्राीयता की झंकार पैदा करने वाले तार को हटाकर लोक की थाप वाली गूंज पैदा की। जनसत्ता के जरिए ठेठ हिन्दी के ठाठ वाली देसी पत्राकारिता का नया दौर प्रारंभ हुआ। बौ(कि प्रखरता और भाव-प्रवणता के संतुलन के साथ प्रभाषजी की भाषा में मालवी छौंक मौजूद है। अब प्रभाषजी नहीं, उनकी पत्राकारिता की प्रभा शब्दों के रूप में शेष रह गयी है। उनको विनम्र सादर श्र(ांजलि स्वरूप प्रस्तुत है उन पर विशेष सामग्री
 
 
 
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