'
 
 
 
दिसम्बर २००९
 
 
 
   
 
 
 
• काशीनाथ सिंह का साहित्य अकादमी • अदम गोंडवी और भारत भूषण का निधन • जयपुर में लिटरेचर पफेस्टिवल में सलमान रुशदी •हिन्दी के कवि कुबेर दत्त और नुक्कड़ नाटक के पितामाह गुरुशरण सिंह का निधनर सम्मान।
 
 
 
गीत/ग़ज़ल
प्रभु त्रिावेदी
मूर्छित सभी विहंग

मरणासन पीपल पड़ा, नीम करे विषपान।
लगा मनुज की बु(ि पर, प्रश्नवाचक निशान॥

कटे सैकड़ों पेड़ जब, पंछी हुए तबाह।
चिड़िया ने चूजों सहित, तब किया आत्मदाह॥

हृदयविदारक दृश्य वह, मूर्छित सभी विहंग।
तिनका-तिनका द्घोंसले, हुए बसेरे भंग॥


वृक्ष काटने से बड़ी, काँकरीट की भीड़।
बया ढूँढ़ती रात-दिन, कहाँ बसाए नीड़॥

रहवासी खुश हो गए, पंछी हुए उदास।
सड़क नीम को खा गई, साक्षी है आकास॥

हत्या करते वृक्ष की, जो दें नेह अगाध।
समय लिखेगा मनुज का, ये जद्घन्य अपराध॥

 
 
 
ऊपर जाये...
पिछे जाये...
 
 
  Copyright 2009 | All right reserved Powered by : Innovative Web Ideas
(A division of Innovative Infonet Private Limited)