फरवरी २०१३
 
 
 
   
 
 
 
• मनीषा कुलश्रेष्ठ को 'लमही सम्मान' • निदा फाजली को पद्मश्री सम्मान •देवेंद्र इस्सर नहीं रहे• ओड़िया लेखिका प्रतिभा रॉय को २०११ का ज्ञानपीठ पुरस्कार•चंद्रकांत देवताले को साहित्य अकादमी पुरस्कार • कुणाल सिंह को युवा साहित्य अकादमी सम्मान • तीसरा 'कृष्ण प्रताप कथा सम्मान' (२०१२) गीतांजलिश्री की कृति 'यहां हाथी रहते थे' को • रविशंकर को मरणोपरांत लाइफटाइम अचीवमेंट ग्रैमी पुरस्कार • विनोद कुमार शुक्ल को हिन्दी काव्य साहित्य में रचनात्मक योगदान के लिए 'परिवार' पुरस्कार • वरिष्ठ साहित्यकार कामतानाथ नहीं रहे
 
 
 
पाखी परिचय

हिन्दी के साहित्यिक पत्रिकाओं की भीड़ में अलग पहचान बना चुकी ‘पाखी’ का प्रकाशन सितंबर 2008 से नियमित जारी है। राजधानी दिल्ली के हिन्दी भवन में हुए इसके प्रवेशांक के लोकार्पण के अवसर पर नामवर सिंह ने उम्मीद जताई थी कि ‘पाखी’ अपनी ही उड़ान भरेगी और यही हो रहा है। अब तक पाखी पत्रिका ज्ञानरंजन, राजेन्द्र यादव, नामवर सिंह और संजीव पर विशेषांक निकाल चुकी है।

इन विशेषांकों की हिन्दी जगत की अपार सराहना मिली। पाखी महोत्सव में अब तक ‘शब्द साधक शिखर सम्मान’ से सम्मानित होने वाले रचनाकार हैं विष्णु प्रभाकर, श्रीलाल शुक्ल, नामवर सिंह, राजेन्द्र यादव और ज्ञानरंजन। साथ ही युवा पीढ़ी के कई रचनाकारों को भी प्रति वर्ष सम्मानित किया जाता है।


 
 
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