फरवरी २०१३
 
 
 
   
 
 
 
• मनीषा कुलश्रेष्ठ को 'लमही सम्मान' • निदा फाजली को पद्मश्री सम्मान •देवेंद्र इस्सर नहीं रहे• ओड़िया लेखिका प्रतिभा रॉय को २०११ का ज्ञानपीठ पुरस्कार•चंद्रकांत देवताले को साहित्य अकादमी पुरस्कार • कुणाल सिंह को युवा साहित्य अकादमी सम्मान • तीसरा 'कृष्ण प्रताप कथा सम्मान' (२०१२) गीतांजलिश्री की कृति 'यहां हाथी रहते थे' को • रविशंकर को मरणोपरांत लाइफटाइम अचीवमेंट ग्रैमी पुरस्कार • विनोद कुमार शुक्ल को हिन्दी काव्य साहित्य में रचनात्मक योगदान के लिए 'परिवार' पुरस्कार • वरिष्ठ साहित्यकार कामतानाथ नहीं रहे
 
 
 
कविता
 
प्रकाश

जन्म : ११ नवंबर १९७६

सभी महत्वपूर्ण पत्रा-पत्रिाकाओं में कविताएं व साहित्यिक-सांस्कृतिक-सामाजिक मुद्दों पर लेख प्रकाशित। वर्ष २००९ में प्रकाशित पहले कविता संग्रह 'होने की सुगंध' को भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का वर्ष २०११-१२ का युवा पुरस्कार।
संपादन सहायक, अनुसंधान एवं भाषा विकास विभाग, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा-२८२००५ उ.प्र.
मो. ०९७६०८८५३०३

 
धन्यवाद का गीत


मैं भाषा में होकर केवल तुतलाता था

भाषा मुझ पर बाहर से धूल-सी झरती थी
उसमें गुम होकर विरल हुई वाणी से
मैं अपनी कथा कहकर पछताता था
कथा पर भी धूल झरती रहती थी

मेरी तुतलाहट बढ़ती जाती थी
मैं धीरे-धीरे एक दिन गूंगा हो जाता था

गूंगा कंठ प्रार्थना में धन्यवाद का गीत गाता था!

 
मिलना
 

वह उसमें जाकर उससे मिल गया था
उसे उसमें थोड़ा और नीचे उतरना था

वह उसके कुएं की मुंडेर पर अटककर
थोड़ा और गहरे मिलने को उत्सुक
नीचे गहराई में देखता था

वह मुंडेर से गहराई में कूदकर
उससे और गहरे में मिल जाता था

विस्पफारित वह देखता था
वहां एक के नीचे एक मुंडेर का क्रम था
वह अनंत में गिरता जाता था
उससे मिलता जाता था

उससे मिलते हुए वह सदा मुंडेर तक ही पहुंचता था
वह वहां से पिफर कुएं की गहराई में झांकता था!

 
विदा का हाथ
 

वह विदा हो रहा था
विदा करते हुए उसके हाथ को उठना था

इस बार यंत्रावत नहीं
हाथ को हाथ की तरह उठना था
बहुत आहिस्ते से उसके बोध ने प्रवेश किया
हरकत में हाथ आहिस्ते से उठता था
उसकी आंख से प्रेम बरसकर गिरता था
वही प्रेम बहता हुआ हाथ में शिखर सा उठता था

हाथ पूरा उठा हुआ विदा में हिलता था
हिलते हुए हाथ में बोध प्रवाहित होता था!

 
उच्चार
 

उच्चारण में उच्चरित नहीं दिखता था
ध्यान से देखने पर
उच्चरित उच्चारण के पीछे छिपा दिखता था
सामने विशु( उच्चारण होता था

उच्चारण उच्चरित का छिलका था
करीब आकर वह गिर जाता था
तब उच्चरित का मुख सापफ दिखता था

सापफ दिखता हुआ उच्चरित
उच्चारण करता था!

 
 
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