फरवरी २०१०
 
 
 
   
 
 
 
•अमरकांत को इलाहाबाद में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित• जितेन्द्र श्रीवास्तव को देवीशंकर अवस्थी सम्मान•दिल्ली में विश्व (पुस्तक मेला ;राजकमल प्रकाशन के स्थापना दिवस पर तीन लखटिया पुरस्कारों की द्घोषणामहुआ माजी के उपन्यास 'मरंग गोड़ नीलकंठ हुआ' को तीसरा राजकमल कृति सम्मानविश्वनाथ त्रिापाठी की पुस्तक 'व्योमकेश दरवेश' को पहला सृजनात्मक गद्य सम्मान अमरेन्दु किशोर की कृति 'बादलों के रंग हवाओं के संग' को चौथा कृति सम्मानस्तंभ लेखक भारत भारद्वाज के खिलापफ वारंटद्ध)
 
 
 
कविताएं
एक कविता कलावादियों के नाम
अरूण शीतांश


एक चिड़िया ने उड़ान भरने की कोशिश की
जहाँ से वह उड़ान भरना चाहती थी
वहाँ कई बहेलिये गुरुदेल टाने बैठे थे
उनका दुर्भाग्य था
कि उनके पास वह मिट्टी की गोली नहीं थी
जिस मिट्टी से बने हैं हम या वे

 

चिड़ियों का जमाना ऐसा आ गया है
कि जिससे बनते हैं
वह उसी से मारती हैं अपने को
कभी-कभी तो बच्चों को गुस्से में
खाना नहीं देती
बात नहीं करती
लेकिन चिड़ियों की आदत है बावजूद इसके
बारिश से बचाना
धूप से छुपाना
उड़ान भरवाना
पंख को प्यार से उड़ाना

चिड़ियों ने भी आजकल के अन्न खा लिए हैं
जिसका असर उन पर भी होने लगा है
जैसा हम अन्न बोएँगे
वैसी पफसल काटेंगे
कोई जादू की छड़ी तो नहीं पास में
हो सकती है यह कविता कलावादियों के नाम हो जाए
पर यह चिड़ियों के लिए ही है
जिसका जिनको दर्द सहा नहीं जाता
... अभी जिंदा होते तो पूछते
चिड़ियों से कलावादियों को दोस्ती करनी चाहिए!

यह बात पूछने से पहले
चिड़ियों के चेहरे के रंग बदल गए
और चिड़िया बेचारी दाना लेकर उड़ गई
जो चारों दिशाओं में बिखेर रही है।

 
 
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