| कैलाश वाजपेयी को साहित्य अकादमी पुरस्कार |
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वर्ष २००९ का साहित्य अकादमी पुरस्कार कैलाश बिहारी वाजपेयी को दिया जाएगा। उन्हें उनकी रचना 'हवा में हस्ताक्षर' के लिए यह पुरस्कार दिया जा रहा है। कैलाश वाजपेयी के अतिरिक्त बद्रीनाथ चतुर्वेदी ;अंग्रेजीद्ध, अबुल कलाम कासिमी ;उर्दूद्ध तथा आत्मजीत सिंह ;पंजाबीद्ध को भी साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की द्घोषणा की गयी है। अकादमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय की अध्यक्षता में कार्यकारी मंडल की बैठक में विभिन्न भाषाओं के निर्णायक मंडलों की ओर से इस बार २४ पुस्तकों को पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। यह पुरस्कार १ जनवरी २००५ से ३१ दिसंबर २००७ के दौरान पहली बार प्रकाशित पुस्तकों पर दिया गया है। |
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कैलाश वाजपेयी का रचना संसार बहुआयामी है और वे अपनी तरह के अकेले कवि हैं जिनकी कविताओं में जीवन ही नहीं प्रकृति, चिंतन और दर्शन के कई रंग मौजूद हैं। कवि होने के साथ-साथ वे चिंतक और पिफल्मकार भी हैं। ११ नवंबर १९३६ में जन्मे कैलाश वाजपेयी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य भी किया। १९७३ में वे मैक्सिको में अतिथि प्रोपफेसर रहे। उनके शोध् के विषय था- 'आध्ुनिक हिन्दी कविता में शिल्प।' उनके प्रमुख काव्य संग्रहों में 'संक्रांत', 'देहांत से हटकर', 'तीसरा अंध्ेरा', 'महास्वप्न का समयांतर', 'सूपफीनामा' एवं 'भविष्य छट रहा है' विशेष उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने कबीर, हरिदास, सूरदास, कृष्णामूर्ति, रामकृष्ण परमहंस जैसे महापुरुषों के जीवन पर वृत्तचित्रा बनाये। साहित्य अकादमी से पूर्व उन्हें हिन्दी अकादमी, एसएस मिलेनियम अवार्ड और व्यास सम्मान से सम्मानित किया जा चुका था।
पुरस्कार पाने वालों में कवि और कथाकारों की संख्या इस बार ज्यादा है। अन्य भाषाओं के लिए प्रद्युम्न सिंह 'जिन्द्राहिया' ;डोगरीद्ध, जॅस पफर्नांडीस ;कोंकणीद्ध, रद्घु लीशडथम ;मणिपुरीद्ध, वसंत आबाजी डहाके ;मराठीद्ध, पफणि मोहंती ;ओड़ियाद्ध, दमयंती बेसरा ;संथालीद्ध और पुविआरसु ;तमिलद्ध, वैदेही ;कन्नड़द्ध, दिवंगत मनमोहन झा ;मैथिलीद्ध, समीरण क्षेत्राी 'प्रियदर्शी' ;नेपालीद्ध, मेजर रतन जांगिड़ ;राजस्थानद्धआदि को यह पुरस्कार दिया जा रहा है। पुरस्कार स्वरूप ५० हजार रुपए, प्रतीक चिन्ह और शाल प्रदान किया जाएगा। ये सभी पुरस्कार १६ पफरवरी २०१० को राजधनी में एक विशेष समारोह में प्रदान किए जाएँगे।
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| 'कहानी को स्वतंत्रा छोड़ना होगा' |
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राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के सहयोग से श्री भारतेंदु समिति लाड़पुर कोटा एवं कथा साहित्य संस्थान कोटा के संयुक्त तत्वाधन में आयोजित कथा-संवाद २००९ परिचर्चा २६ दिसंबर को भारतेंदु समिति कोटा में संपन्न हुई। इस कार्यक्रम का उद्द्घाटन 'पाखी' पत्रिाका के संपादक अपूर्व जोशी, कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. गोपाल सिंह नरुका एवं राजेश बिरला ने किया। इस कार्यक्रम का आयोजन दो सत्राों में किया गया था। प्रथम सत्रा का विषय हिन्दी कहानी में नारी-विमर्श था। इस पर चर्चा करते हुए अपूर्व जोशी ने कहा कि क्या हम वास्तव में नारी को मन से उचित दर्जा दे पाते है। हमारी कथनी और करनी में बहुत अंतर है। बाहर नारी विमर्श पर बहसें करना और द्घर में उसे प्रताड़ित करना, कहीं यही तो हमारा पुरुषार्थ नहीं रह गया है। इस सच्चाई को सामने लाना साहित्यकार का दायित्व है। डॉ. गोपाल सिंह, डॉ. नरेन्द्र चतुर्वेदी एवं रद्घुनाथ मिश्र आदि ने नारी विमर्श सत्रा में कन्या भू्रण हत्या से लेकर वृ( महिलाओं की समस्याओं पर सवाल उठाये।
द्वितीय सत्रा का विषय समकालीन हिन्दी कहानी का रहा। इस विषय पर अपने विचार देते हुए समीक्षक डॉ. पल्लव ने कहा कि आजादी के बाद कहानियों का स्वरूप ही बदल गया है। १९९१ के बाद की कहानियों से मानवीय संवेदनाएँ गायब हो गई है। सत्रा के मुख्य अतिथि साहित्यकार ;सं. 'पुनर्नवा'द्ध राजेन्द्र राव ने कहा कि आज की हिन्दी कहानी को उसके स्वतंत्रा स्वभाव के लिए छोड़ना होगा, अन्यथा संवेदना का पक्ष तिरोहित हो जाएगा। इस सत्रा के विशिष्ट अतिथि 'पाखी' के कार्यकारी संपादक प्रेम भारद्वाज ने अपने विचार रखते हुए कहा कि चार वर्ष पूर्व हमारी संसद में सौ से अध्कि सांसद करोड़पति थे, वर्तमान लोकसभा में ये आंकड़ा तीन सौ पार कर गया है। और ये सांसद आम जनता के साथ-साथ साहित्य से भी दूरी बनाए हुए हैं। इसी सत्रा में क्षमा चतुर्वेदी, डॉ. नरेन्द्र चतुर्वेदी एवं अतुल चतुर्वेदी ने भी अपने-अपने विचारों से लोगों को अवगत कराया।
इस समारोह में अध्यक्ष ओम बिरला ;विधयक, कोटाद्ध ने शाल, श्रीपफल एवं प्रशस्ति पत्रा प्रदान कर राजेन्द्र राव, अपूर्वजोशी, प्रेम भारद्वाज एवं डॉ. पल्लव को उनके अवदान के लिए सम्मानित किया। |
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| हमें अतीतजीवी नहीं, भविष्योन्मुख होना चाहिए |
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परास्नातक हिन्दी शोध् केंद्र, पीजी कॉलेज, अर्मापुर, कानपुर एवं हंस के मानसरोवर क्लब के संयुक्त तत्वावधन में दो दिवसीय ;१३-१४ दिसंबर, २००९द्धराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन िकया गया। इस संगोष्ठी का विषय 'हिन्दी साहित्य और परिवर्तन की दिशाएँ' था। इस अवसर पर शोध् स्मारिका का विमोचन कथाकार एवं हंस के संपादक राजेन्द्र यादव, साहित्यकार गिरिराज किशोर व कहानीकार मैत्रोयी पुष्पा के अतिरिक्त प्रो. हेतु भारद्वाज, संजीव ;कार्यकारी सं. हंसद्ध ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेन्द्र यादव ने अपने वक्तव्य में कहा कि भविष्य का साहित्य हमारे पास नहीं है। पहले का साहित्य विचारधरा पर आधरित साहित्य है और विचार एवं विचारधरा ने हमारा बहुत साथ नहीं दिया है। हमें अतीतजीवी नहीं, भविष्योन्मुख होना चाहिए। अपने विचार व्यक्त करते हुए कथाकार संजीव ने कहा कि जब तक रूढ़ियों को खरोंचा नहीं जाएगा तब तक साहित्य कुछ नहीं करेगा। हमें समझना होगा कि वो संजीवनी शक्ति कौन सी है जो साहित्य देता है और पैसा नहीं दे पाता। डॉ. हेतु भारद्वाज ने लेखक संद्घों की प्रासंगिकता पर सवाल खडे़ किये। इसी तरह से मैत्रोयी पुष्पा ने स्त्राी विषय पर बोलते हुए कहा कि स्त्रिायाँ तो बदल ही रही हैं पर पुरुषों को भी बदलना चाहिए, समाज में तभी बदलाव आएगा। हम स्त्रिायों ने हजारों सालों से आपकी नीतियों को स्वीकार किया है अब आप भी स्त्राी स्वतंत्राता के कदमों के परिवर्तन को स्वीकार कीजिए।
राष्ट्रीय संगोष्ठि की संयोजिका डॉ. दया दीक्षित ने बताया कि एक प्रगतिशील रचनाकार अपने सृजन के माध्यम से हमें इन बदली हुई परिस्थितियों में परंपराओं पर पुनर्विचार के लिए प्रेरित करता है। आज साहित्य को इन परिवर्तनों को इनकी संभावनाओं और अच्छे-बुरे प्रभावों को रेखांकित करते हुए नई चुनौतियों को स्वीकार करना होगा। इस संगोष्ठी का संचालन कमल मसद्दी एवं गायत्राी सिंह ने किया। |
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| शरद दत्त-मदन कश्यप को शमशेर सम्मान |
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| वर्ष २००९ का शमशेर सम्मान सृजनात्मक गद्य के लिए शरद दत्त व कविता के लिए मदन कश्यप को दिया गया है। कवि शमशेर की जयंती पर इस सम्मान की द्घोषणा करते हुए शमशेर सम्मान समिति के संयोजक प्रताप राव ने बताया कि आगामी १२ मई को नई दिल्ली में यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। शरद दत्त दिल्ली दूरदर्शन के बहुआयामी प्रोड्यूसर के रूप में प्रसि( थे। उन्हें कई वरिष्ठ साहित्यकारों व पिफल्मी हस्तियों को पहली बार दूरदर्शन पर प्रस्तुत करने का श्रेय है। कई सम्मान प्राप्त कर चुके दत्त ने भारतीय सेना पर पचास से अध्कि वृत्तचित्राों का निर्माण किया है। वहीं कवि मदन कश्यप जन आदोलनों, राजनीति, पत्राकारिता व संस्कृति कर्म में सक्रिय रहे हैं। इस सम्मान के लिए चयन वरिष्ठ रचनाकारों विष्णु नागर, लीलाध्र मंडलोई और कर्मेंदु शिशिर की समिति ने किया। |
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| परिवार में निहित है जातिवाद की जड़ता |
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| ९ जनवरी २०१० को साहित्य अकादमी सभागार में रमणिका पफाउंडेशन एवं शिल्पायन प्रकाशन द्वारा आयोजित लोकार्पण समारोह में संजीव खुदशाह की पुस्तक 'आध्ुनिक भारत में पिछड़ा वर्ग' का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार एवं 'हंस' के संपादक राजेन्द्र यादव ने किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि देश में कुछ ऐसी जातियाँ हैं जो किसी श्रेणी में नहीं आती हैं। पफलतः उनके पास कोई पिफलास्पफर भी नहीं है। जबकि दलितों के पास डॉ. अंबेडकर व पफुले हैं। जातिवाद की जड़ता परिवार में निहित है। वरिष्ठ आलोचक मस्तराम कपूर एवं मैनेजर पांडे ने भी इसी संदर्भ में अपने विचारों से अवगत कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कवयित्राी रमणिका गुप्ता ने की। उन्होंने कहा कि आध्ुनिक भारत में पिछड़े वर्ग की जांच पड़ताल लेखक संजीव खुदशाह ने अंबेडकरवादी दृष्टिकोण से की है। पुस्तक पर समीक्षात्मक आलेख का पाठ रमेश प्रजापति ने किया। |
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| शैलेय को परिवेश सम्मान |
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| साहित्यिक पत्रिाका 'परिवेश' द्वारा प्रतिवर्ष किसी रचनाकार को दिया जाने वाला '१६वां परिवेश सम्मान' वर्ष २००९ के लिए कवि व कथाकार शैलेय को देने का निर्णय किया गया है। १९६६ में रानीखेत के जैंती गाँव में जन्में शैलेय तमाम जनसंगठनों और श्रमिक आंदोलनों के साथ सक्रिय रहे। शैलेय की कहानियों और कविताओं में पहाड़ भी उपस्थित रहा है। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'यहीं कहीं से' एवं 'या' हैं। पत्रिाका के संपादक मूलचन्द गौतम ने बताया कि 'परिवेश' के ५९वें अंक में शैलेय के साहित्यिक अवदान पर विशेष सामग्री दी जाएगी। इससे पहले उक्त सम्मान हरीचरन प्रकाश, ओमप्रकाश बाल्मीकि, दामोदर दत्त दीक्षित, हसन जमाल, सुभाष चन्द्र कुशवाहा को मिल चुका है। |
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| आकाशवाणी का स्वर्ण जयंती समारोह |
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आकाशवाणी पटना के प्रादेशिक समाचार एकांश के ५० वर्ष पूरा होने पर २८ दिसंबर को स्वर्ण जयंती समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर विधन परिषद के सभापति ताराकांत झा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्राों के विकास में आकाशवाणी पटना से प्रसारित समाचारों की प्रमुख भूमिका रही है। यहाँ से प्रसारित समाचार सामाजिक सद्भाव पफैलाने में सहायक रहे हैं। साथ ही उन्होंने आकाशवाणी पटना के समाचार संपादक संजय कुमार द्वारा संपादित ओर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आकाशवाणी समाचार की दुनिया' का लोकापर्ण किया। कार्यक्रम के दौरान केदारनाथ सिन्हा, एम जेड अहमद, अरूण कुमार वर्मा, विजय कुमार, शाह वासिपफ इमाम को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
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| नंद किशोर को सम्मान |
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| प्रतिष्ठित नरेश मेहता स्मृति सम्मान वर्ष २००९ के लिए वरिष्ठ लेखक और विचारक नंदकिशोर आचार्य को दिया जाएगा। उन्हें यह सम्मान उनके राजीनतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर गहन लेखन के लिए दिया जा रहा है। निर्णायक समिति ने उनकी 'संस्कृति की सामाजिकी' और 'सभ्यता का विकल्प' को पुरस्कार के लिए आधर बनाया। वैचारिक और सांस्कृतिक लेखन के लिए मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा स्थापित इस सम्मान में प्रशस्ति पत्रा और ५१ हजार की राशि प्रदान की जाती है। इससे पहले यह सम्मान डॉ. गोविंदचंद्र पांडे, यशदेव शल्य एवं मुकुंद लाठ को दिया जा चुका है। |
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| शिवदयाल की कहानियों पर गोष्ठी |
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२८ नवम्बर, २००९ को पटना में 'शिवदयाल की कहानिया' ;संदर्भ - भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित कहानी संग्रह 'मुन्ना बैंडवाले उस्ताद'द्ध पर एक विमर्श गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी की शुरूआत में शिवदयाल ने अपनी कहानी 'आलोक' का पाठ भी किया।
चर्चा के आरम्भ में समीक्षक डा. शैलेश्वर सती प्रसाद ने कहा कि शिवदयाल की कहानियाँ वैचारिक, राजनीतिक एवं कलात्मक स्तर पर हिन्दी कहानी को नवीन आयाम देती हैं और यह संग्रह इस दशक की संभवतः सर्वश्रेष्ठ कथा है। शीर्षक कथा 'मुन्ना बैंडवाले उस्ताद' अद्भुत कहानी है और यह प्रेमचंद की ईदगाह से कमजोर नहीं। कवि आलोक ध्न्वा ने कहा कि शिवदयाल आंदोलनों की पृष्ठभूमि से आए रचनाकार हैं। इनकी कहानियों में विचार और संवेदना की यात्राा साथ-साथ चलती है। प्रख्यात कथाकार उषाकिरण खान ने भी संग्रह की हर कहानी को मंझी हुई बताया। शिवदयाल ने मध्यवर्ग की त्राासदियों और विडंबनाओं को अत्यंत परिपक्वता और कलात्मकता के साथ उजागर किया है। साथ ही उपन्यासकार व्यास मिश्र, अरूण कुमार, संजयक कुमार कुंदन, निखिलेश्वर वर्मा ने भी उनकी कहानियों के बारे में अपने विचार रखे। इस गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार शेखर ने की। इस विमर्श गोष्ठी का आयोजन 'वातायन' ने किया था और गोष्ठी का संचालन इसके निदेशक वरिष्ठ कवि राजेश शुक्ला ने किया। |
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| 'मिट्टी की गाड़ी' का मंच |
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| हिन्दी अकादमी, दिल्ली ने मिरांडा हाउस की हिन्दी नाट्य समिति 'अनुकृति' के साथ नाटक 'मिट्टी की गाड़ी' का मंचन किया। शूद्रक द्वारा लिखे संस्कृत नाटक 'मृच्छकटिकम्' का प्रसि( नाट्यकार और लेखक मोहन राकेश द्वारा किए गए इस हिन्दी अनुवाद का निर्देशन युवा निर्देशक राम जी बाली ने किया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के खचाखच भरे अभिमंच सभागार में प्रस्तुत इस नाटक में पुरुष पात्राों की भूमिकाओं को भी छात्रााओं ने ही बखूबी निभाया। अकादमी के सचिव डॉ. रविन्द्र नाथ श्रीवास्तव 'परिचय दास' ने ५वीं शताब्दी के इस नाटक को 'पहले सामाजिक नाटक' की संज्ञा देते हुए कहा कि इस नाटक में एक ऐसा 'समकाल' मौजूद है जिसे आज भी महसूस किया जा सकता है। प्रो. अशोक चक्रध्र ने पूरे नाटक को छात्रााओं द्वारा तैयार करने और पुरुष भूमिकाएँ स्वयं निभाने को अनूठा और सराहनीय प्रयास बताया। मुख्य अतिथि केशव चन्द्रा ने कहा कि तत्कालीन सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के सशक्त चित्राण के कारण इस नाटक में प्रत्येक समय में समसामयिक बने रहने की अद्भुत क्षमता है। नाट्य प्रस्तुति के दौरान मिरांडा हाउस की प्रिंसिपल प्रतिभा जौली, हिन्दी विभाग की अध्यक्ष डॉ. अर्चना वर्मा के साथ महत्वपूर्ण साहित्यकार शिवमूर्ति, नीलाभ, संजीव मौजूद थे। |
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| अपनी धरती पर त्रिालोचन-स्मृति |
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महाकवि त्रिालोचन शास्त्राी के गाँव कटद्घरा चिरानी पट्टी ;कादीपुर, जि. सुलतानपुर, उ.प्र.द्ध के लोगों ने उनकी द्वितीय पुण्यतिथि पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया। समारोह में मुख्य वक्ता युवा आलोचक ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह 'रवि' ने कहा कि त्रिालोचन हिन्दी के क्रांतिकारी कवि थे। जनबोध् एवं रागबोध् से गहरे जुड़ाव के कारण त्रिालोचन के भाषा आश्चर्यजनक रूप से बलशाली है। उनमें भाषा के माध्यम से नए अर्थों की खोजने की छटपटाहट हमेशा रही है। समारोह की अध्यक्षता डॉ. आद्याप्रसाद सिंह प्रदीप ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधयक महेन्द्रप्रताप मिश्र थे।
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| काव्य-कृतियों का लोकार्पण |
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| विप्रा कला साहित्य मंच, परमार्थ, अक्षरा के संयुक्त तत्वावधन में मुरादाबाद में साहित्यकार शचीन्द्र भटनागर की दो कृतियों 'ढाई आखर प्रेम के' तथा 'अखंडित अस्मिता' का लोकार्पण किया गया। इन कृतियों का लोकार्पण नवगीतकार डॉ. महेश्वरी तिवारी, साहित्यकार डॉ. गिरिराज शरण अग्रवाल, डॉ. बलजीत सिंह तथा डॉ. योगेन्द्रनाथ अरूण की उपस्थिति में हुआ। डॉ. गिरिराज शरण अग्रवाल ने कवि की रचनाओं के बारे में बताया कि शचीन्द्र भटनागर के गीत परंपरावादी प्रेम गीत के रूप में संग्रहित किए गए हैं किन्तु वास्तव में ये गीत बहुआयामी हैं। |
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| 'खंडित अतीत' को साहित्य सम्मान |
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अनुराग सेवा संस्थान लाल सोट द्वारा अपने १५वें वार्षिक समारोह में साहित्यकार ईश्वर चन्द्र सक्सेना को उनके उपन्यास 'खंडित अतीत' के ;स्व. मदन लाल अलाला स्मृतिद्ध अनुराग साहित्य सम्मान २००९ प्रदान किया गया। पुरस्कारस्वरूप ११ सौ रूपये, अनुराग सेवा संस्थान का प्रतीक चिन्ह, प्रशस्ति पत्रा आदि प्रदान कर सम्मानित किया गया। हरी राम मीणा इस समारोह के मुख्यअतिथि थे। अध्यक्षता बृज भाषा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल प्रसाद मुद्गल ने की।
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| पंकज मित्रा को मीरा स्मृति |
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नई दिल्ली में १७ दिसंबर को मीरा पफाउंडेशन और साहित्य भंडार, इलाहाबाद की ओर से आयोजित कार्यक्रम में युवा कहानीकार पंकज मित्रा को कहानी विध के लिए 'मीरा स्मृति पुरस्कार ०९' से सम्मानित किया गया। पुरस्कारस्वरूप उन्हें शाल, श्रीपफल, मानपत्रा एवं २५ हजार रूपये प्रदान किये गये। पुरस्कार शेखर जोशी, काशीनाथ सिंह, ममता कालिया, विश्वनाथ त्रिापाठी की उपस्थिति में आयोजक सतीश चन्द्र अग्रवाल एवं डॉ. कमला प्रसाद द्वारा प्रदान किया गया। कहानीकार डॉ. काशीनाथ सिंह ने कहा कि पंकज कहानीकार के रूप में रेणु की विरासत के संवाहक माने जा सकते हैं। पंकज की कहानियों में पूरी जनपदीय भाषा का ऐसा स्वरूप दिखाई पड़ता है जो उन्हें समकालीन कहानीकारों से पृथक करता है। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि कथाकार शेखर जोशी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि समाज में सब कुछ खराब ही नहीं है। इसका दूसरा पक्ष भी है। अतः उसे भी दिखाना चाहिए।
प्रस्तुति : प्रतिभा कुशवाहा |
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