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फरवरी २०१०
 
 
 
   
 
 
 
•साहित्याकार शेखर जोशी को प्रथम चंद्रयान पुरस्कार २०१० से सम्मानित किया गया। •काशीनाथ सिंह के उपन्यास काशी का अस्सी पर केंद्रित विशेषांक गल्पेतर गल्प का ठाठ का लोकार्पण। •मदन कश्यप और शरद दत्त करे मिला शमशेर सम्मान। • कथा यू के का पआनन्द साहित्य सम्मान महेंद्र दवेसर दीपक को 'अपनी अपनी आग' एवं कादम्बरी मेहरा को 'पथ के पफूल' के लिये दिया जा रहा है।
 
 
 
लद्घु-कथाएँ
बंटवारा
शर्मा जी के द्घर से रोजाना उनकी दोनों बहुओं के आपस में झगड़ने की आवाजें आती थी।

एक दिन शर्मा जी के पड़ोसी ने कुछ दिनों से उनके द्घर से, दोनों बहुओं के झगड़ने की आवाजें न सुनकर शर्मा जी से पूछा-'क्या बात हैं, अब आप के द्घर से दोनों बहुओं के झगड़ने की आवाजें नहीं आती, क्या कोई चमत्कार हो गया हैं?'
'चमत्कार तो नहीं हुआ, हाँ! बंटवारा जरूर हो गया हैं।' शर्मा जी ने ठंडी साँस छोड़ते हुए बताया।
१६८-बी, सूर्यदेव नगर, पो. सुदामा नगर, इन्दौर, म.प्र.
मो. ९४२४५९४८७३

 
कमजोर
 
भैया! एक पाव अनार दे दो। अच्छा सा देना। मुझे ठीक छाँटना नहीं आता।' बाजार में पफल वाले के पास खड़ी काली वेशभूषावाली महिला ने कहा। उसका बहुत लंबा गोटेदार कुर्ता और द्घाद्घरा सबका ध्यान आकर्षित कर रहा था। 'अरे, तू तो लोहा काट देती है। चल छाँट ले।' पफल वाले ने मजाक के मूड में कहा।' मैं तो आदमी को भी काट दू। अनार खाने की आदत नहीं। डॉक्टर ने द्घरवाले को खाने को कहा है। ले, ये तोल दे।'
'बारह रुपये का है।' पफलवाले ने कहा। 'दस लगा लो न। इतना महँगा है।'
'नहीं, बारह का लेना है तो ले ले। टाइम खराब मत कर।' कहकर पफलवाला दूसरे ग्राहकों की ओर मुड़ गया। 'ठीक है। बारह का ही दे दो।' गड़िया लुहार महिला ने दो रुपये और निकाल लिए।
'जा, भाग जा। नहीं देता। मुझे बेचना ही नहीं है एक पाव। कहीं और से ले ले।' पफल वाले ने झिडक दिया। महिला की दयनीय स्थिति देखकर मैंने पफलवाले से कहा, 'भैया दे दो न। बाकी लोग भी तो मोल भाव करते हैं। थोड़ा सामान भी लेते हैं।'
'चलो आप कहती हैं तो दे देता हूँ।' अहसान करते हुए पफलवाले ने उस महिला के हाथ में अनार पकड़ाया। इतने में एक संभ्रांत महिला वहाँ आई जिसके गले में एक पर्स लटक रहा था।' उसने पूछा ''भैया! ये सेब क्या भाव है?''
पफल वाले ने कहा। ''मैडम ये सेब पचास रुपये किलो हैं।'
'अरे, ये इतने खराब सेब पचास रुपये किलो।'
'मैडम! ये बिलकुल ताजा सेब हैं। आज ही मंडी से आए हैं।'
'चालीस रुपये देने हैं तो ठीक है। नहीं तो मैं जाती हूँ।'
'मैडम, नाराज क्यों होती हो। ले लो।'
'ठीक है, आधा किलो दे दो।'
दुकानदार ने बहुत ही विनीतभाव से आधा किलो सेब दे दिए।
गरीब आदमी भी अपने से कमजोर पर रौब झाड़ता है और अमीर के तलवे चाटता है।
१९७५/४, अर्बन एस्टेट, गुड़गांव-१२२००१, हरियाणा
मो. ९८७१९४८४३०
 
 
 
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