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आँगन में लगे कैक्टस में पफूल खिल आया था। रोजी ने जैसे ही देखा उसने जोर से पिफलिप्स को आवाज दी- ''पिफल् कम एंड सी।'' पिफलिप्स डाइनिंग रूम से बैठा डैडी के साथ गंभीर चिंतन में था। 'बोलो क्या है हर बात पर पिफल् कम पिफल् कम' ऐसे ही झुंझलाया था वो। उसके डैडी विलियम गट्बस्ट ने उसे इशारे से चुप रहने को कहा और बोले 'क्या हुआ रोजी।' रोजी अंदर आकर |
हकबकाने लगी- 'डैड मॉम के लिए कैक्टस ने पफूल दिया है। मॉम कहती थी बारह साल से पालकर रखा है इसे, कब वंशबेल बढ़ेगी इसकी। आज देखो चलकर, क्रिसमस रंग में हल्की पीली परागकणों की रेडियम पर कितना सुंदर फ्रलॉवर है।' विलियम और पिफलिप्स उठकर देखने गए। वास्तव में पिछले चार दिनों से कली से पफूल बनने की प्रोसेस चल रही थी और इतने ही दिन हुए सैश को अंतिम साँस लिए हुए। इसका मतलब उसकी आत्मा कली में कैद होकर रह गई है। कितनी उत्सुक थी वो इस पफूल को देखने की। आँगन में जितने भी पेड़-पौधे उसने पाल पोस रखे थे, उन्हें देखकर लगता था उसकी जान बसती थी उनमें।
'चलो डैड चलें' पिफर वही तलाश, वही बैचेनी। अंदर सैश के कमरे से सैंट और अगरबत्ती की गंध सब तरपफ पफैल रही थी, बपर्फ हाउस में तब्दील हो चुका था कमरा। रोजी और उसकी नन्हीं सी परी सामंथा सारे दिन इस इंतजाम में लगे रहते कि कहीं सैश को कोई परेशानी न हो। उसके शरीर से दुर्गंध न पफैले।
उधर जिला कलेक्ट्रेट से एस. कुमारन का नोटिस आ चुका था और शाम चार बजे विलियम को तलब किया गया था- 'अरे रे... क्या परेशानी है जीवन में इतनी हताशा कभी नहीं हुई' ऐसा लगता था मानो विलियम के शरीर से कोई सारा खून चूसे जा रहा हो और वो अपने शरीर को बस इधर से उधर द्घसीट रहा हो। आँगन में हमिंग बर्ड के अंडों से बच्चे निकले हैं। सारे दिन वो उधेड़बुन में लगी चुग्गा ढूँढ़ती रहती और विलियम उसे देखने पर भी निराशा के गर्त में डूबता। पहले जब भी बर्ड्स ने अंडे दिए द्घर में दीवाली जैसी खुशियाँ मनाई जाती थीं। पर अब तो उसकी किसी चीज में रुचि नहीं रह गई थी।
शाम चार बजे जब जिला कलेक्टर के बंगले पर पहुँचे तो कलेक्टर ने तमतमाए चेहरे के साथ उसके हाथ आसपास के नंबर की दी एप्लीकेशन रख दी- ''हस्ताक्षर-रोड्स कॉलोनी लक्षदीप'' ऊपर ढेर सारे पड़ोसियों के नाम, सब एक दूसरे में गडमड हो एक दूसरे में द्घुसकर मानो निकलने के लिए छटपटा रहे हों। अक्षर वास्तव में उलझ गए थे साथ ही उन पड़ोसियों के नाम वो पढ़ नहीं पा रहा था जिनके नाम इसमें लिखे थे। पिफलिप्स ने डैड का हाथ हिलाया- एस. कुमारन ने संजीदगी से कहा- 'कैसे आप एक शव को द्घर में रखे हैं मिस्टर विलियम। यदि आप अंतिम संस्कार नहीं कर सकते तो जिला प्रशासन आपकी मदद कर सकता है। मैं आपको एक द्घंटे में सारी व्यवस्थाएँ करने के ऑर्डर दे रहा हूँ। कैसे आप कानून हाथ में ले सकते हैं, संक्रमण और प्रदूषण को बढ़ावा दे सकते हैं?' मिस्टर विलियम शांत खड़े थे परन्तु पिफलिप्स को गुस्सा आ गया-
''सर आप किसे 'शव' कह रहे हैं मेरी माँ को, जिसने मुझे पैदा किया पाला, पोसा? एक बड़ा अधिकारी बनाया सर? मैंने अपनी माँ से जीवन जीना सीखा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिस्र के पिरेमिड का प्रोजेक्ट चल रहा है उनके कारण और आप उन्हें 'शव' कह रहे हैं। जिनके बगैर मैं एक दिन भी जीवन की कल्पना नहीं कर सकता। एक बात बताएँगे सर... क्या अगर अपनी माँ... भगवान न करे... मुझे पता नहीं... क्या उनके न रहने पर वे मात्रा श... रह जातीं। प्लीज... सर... आप आई.ए.एस. हैं हमारी परेशानी समझें।'
एस. कुमारन कुछ क्षण चुप रहे। सोचने लगे उस पुस्तक के बारे में जिसमें एक आदमी पूरे बरस तक अपनी पत्नी के स्केलेटन ;कंकालद्ध को सीने से चिपकाए द्घूमता रहा। शायद आर.रिप्ले की पुस्तक ''बिलीव इट ऑर नॉट'' में पढ़ा था। कुछ सोचकर बोले... ''क्या चाहते हो कानूनन एक नागरिक की परेशानी दूसरे की सुविधा बने और हम इंतजार ही करते रहें। आप किस अधिकार के तहत उसे द्घर में रखे हुए हैं समझ के बाहर है। मुझे खेद है आपकी माँ के लिए। मैंने कंडोलैंस लैटर तभी भिजवाया था। चार दिन बहुत होते हैं और लगातार आपके खिलापफ पफोन आ रहे हैं, एप्लीकेशन इकट्ठी होती जा रही है।'' अंततः ऑर्डर की कॉपी थमा ही दी उनको।
अब पिफलिप्स और विलियम थके हारे से द्घर लौटे। एक चक्कर पहाड़ी पर भी लगा आए। कुँए में तीन लाशें पड़ी थीं क्षत विक्षत और हजारों कीड़े मकोड़े, दीमकें उनके मृत शरीर को चटोरने में लगे थे। दोनों बेमन से नीचे उतरे तभी उन्हें नुक्कड़ पर बेकरी चलाने वाली मिसेज मैक्सी दिखीं। 'व्हाट अबाउट सैश?' दोनों ने निराशा से सर हिलाया। मिसेज मैक्सी के पूर्वजों ने लक्षद्वीप को बसाने के लिए कितनी मेहनत की, इससे कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। मिसेज मैक्सी के दोनों बच्चे अमेरिका में हैं और मिस्टर मैक्सी सुनामी के शिकार हो गए थे। सब कुछ नए सिरे से शुरू करके मिसेज मैक्सी ने अपना जीवन बेहतर बनाया। पारसी समाज के जितने भी रीतिरिवाज हैं मिसेज मैक्सी से बेहतर कोई नहीं जानता। पर अब वो भी पिफलिप्स और विलियम की कोई मदद नहीं कर पा रही हैं।
द्घर लौटकर विलियम ने हाथ पैर धोए और पिफलिप्स से इशारे में पूछा क्या किया जाए। सैश के कमरे से रो८ा ;गुलाबद्ध की खुशबू आ रही थी। रो८ाी ने बताया कि कर्नल संजीव ने बुके भेजा था, विलियम की भवें तन गईं। कर्नल संजीव ही तो वो शख्स है जिसने सैश को खोखला कर दिया था। विलियम का दोस्त कर्नल संजीव एक निहायत ही द्घटिया किस्म का आदमी है। पिफर पीछे से आया होगा। कहीं उसने रो८ाी से चाय का आग्रह तो नहीं किया। रो८ाी वैसे भोली भाली लड़की है। उसे पिफलिप्स ने अपने प्रेमजाल में पफांस कर शादी के लिए तैयार कर लिया था। रो८ाी का आई क्यू एकदम कम था, उसे बेवकूपफ बनाना बेहद आसान था। कर्नल संजीव को जाने कहाँ से इसकी खबर लग गई।
रो८ाी ने बताया पूरे दो द्घंटे मातमपुर्सी करके गया है। विलियम और सैश की गृहस्थी में कर्नल ने ही आग लगाई थी। सैश बैंक ऑपफ लक्षद्वीप में पी.ओ. थी। जबसे विलियम मर्चेंट नेवी से रिटायर होकर लौटा तबसे ही उसके एक-एक दिन की जिंदगी में संबंध किरिच किरिच होकर टूटने लगे थे। 'एक तरपफ सैश संस्कृति और विरासत का बाजा बजाती दूसरी तरपफ कर्नल संजीव को पाले बैठी थी। अरे कर्नल दिलपफेंक आदमी है इसका पता चलते ही सैश को उसका मेरी अनुपस्थिति में द्घर पर आना बंद कर देना था।' विलियम सोच रहा था। 'पिफर मृत देह के पास दो द्घंटे बैठक क्या करके गया बास्टर्ड कहीं का, मेरा बस चले तो साले को शूट कर दूँ।' इसी उधेड़बुन में पूरा आधा द्घंटा हो गया। अमेरिका से उसकी सिस्टर मैंडी का पफोन आया था। वो बता रही थी कि अमेरिका में तो पारसियों के साथ यहूदी से भी बुरा बर्ताव करते हैं, मृत देह को उसी दिन इलैक्ट्रिक मॉर्चुरी में धरवा दिया जाता है, पिफर बैठे रहो अपने संस्कारों का रोना लेकर। मैंडी विलियम की इकलौती बहन है, ऐसी कोई बात नहीं जो मैंडी के साथ उसने शेयर नहीं की हो। पिफलिप्स ने अपने किसी मित्रा को पफोन लगाकर बात की और वो चाबी लेने चला गया।
विलियम ने रो८ा का बुके सैश के कमरे से हटवाकर लॉन में पफेंक दिया और पहली बार वो रो८ाी पर जोर से गरजा- हाऊ डेयर ही? व्हाए डिड यू एलाऊ हिम, आर यू मैड? रो८ाी के लिए इतना ही कापफी था। उसने सामंथा को गोद में उठाया और सैश के कमरे में बैठकर रोने लगी। अभी सैश जिंदा होती तो रो८ाी को इतनी ते८ा आवाज नहीं सुननी पड़ती। अब तो द्घर में कलह की संभावनाएँ बढ़ जाएँगी। पिफलिप्स अपने प्रोजेक्ट के लिए इजिप्ट चला जाएगा और विलियम की तीमारदारी भी कोई कम नहीं करनी पड़ती। सैश बैंक से लौटते ही सबसे पहले जिंजर सूप की तैयारी करती, पिफर विलियम शाम की ड्रिंक्स के लिए स्नैक्स तैयार करवाता। रात में ८ कोर्स डिनर तैयार होता। इस शाम के खाने में पूरे चार द्घंटे के लिए सैश बिजी होती है। तब भी विलियम सोचता था कि अगर कर्नल के साथ सैश की मित्राता को लेकर मैं उससे डिवोर्स ले लूँ तो भी मुझे अंतर नहीं पड़ना। सैश उम्र में विलियम से पाँच साल बड़ी थी पर व्यावहारिक बहुत थी। हालांकि कर्नल के साथ उसके मित्रावत संबंध थे पर जाने क्यूं विलियम को यह मित्राता बिल्कुल पसंद नहीं थी।
एक अंतर यह था कि कर्नल छह पफीट का स्मार्ट पफौजी था, गेहुँआ रंग होने के बावजूद उसके चेहरे पर एक अजीब सा आकर्षण था। जबकि विलियम का चेहरा चौड़ा और अनाकर्षक था। विलियम एकदम गोरा, परंतु गोरा रंग उसी तरह से द्घिन पैदा करता जिस तरह से एक सपफेद भक् अंग्रेज का रंग अजीब द्घिन पैदा करता है। उसमें अंग्रेजियत के बिगड़ैल होने की अनासक्ति थी। विलियम का बेटा पिफलिप्स सैश की तरह सुंदर और आकर्षक है। रात दिन नौकरी में खटती सैश जब पहली बार कर्नल से मिली तो उसकी पर्सनेलिटी से बेहद प्रभावित हो गई। विलियम शुरू में समझ नहीं पाया, वो लगातार कर्नल को रात की ड्रिंक्स पर आमंत्रिात करता रहा। मुरझाई सी सैश उसे देखते ही खिल उठती और खुशी खुशी डिनर तैयार करती। कर्नल भी उसकी तारीपफ के कसीदे पढ़ता। जिन गुणों के लिए विलियम ने सैश को पसंद किया था, वो ही अब उसे अवगुण लगने लगे थे। एक रात कर्नल, सैश की बर्थडे पर नीले पर्ल का नैकलेस लाया और सैश ने बड़ी नजाकत से विलियम को ताना मारा कि इतने साल विदेशों में रहे कभी दो कौड़ी की चीज तक नहीं लाए। उस समय बात आई गई हो गई। पर सैश हर अच्छे ऍकेजन पर वही नीले पर्ल का हार ठांस लेती और विलियम की तरपफ देखकर ऐसे मुस्कराती मानो उसे चिढ़ा रही हो। विलियम के तन बदन में आग लग जाती। वो अपनी मुट्ठियाँ कस लेता। उसकी इच्छा होती कि वो कर्नल को गोली मार दे। ऐसे में एक सिविलाइज्ड नागरिक और पॉलिश्ड एटीट्यूड के कारण चुप्पी साध लेता था।
आज जबसे रो८ाी ने बताया कि दो द्घंटे की मातमपुर्सी करके गया है उसका मन बैचेन हो गया। सैश के गले में अभी भी वही पर्ल नेकलेस है और जब तक उसका संस्कार नहीं होता उसे लगता है कि कर्नल उसके गले में झूल रहा है। पिफलिप्स लगभग दौड़ता हुआ आया। उसने विलियम से धीरे से कुछ कहा और सब तैयारी में लग गए। सैश ने हरे गाउन पर रंगबिरंगे बटन लगवाए थे और उसमें नीला लेस लगा बेहद खूबसूरत लग रही थी। लगता ही नहीं कि उसे मरे चार दिन हो गए।
एक लंबी सी लॉरी में उसे लिटाया गया। सामंथा जोर-जोर से रोकर चलने की जिद करने लगी लेकिन रोजी ने उसे रोक लिया। पिफलिप्स और विलियम चले गए। बपर्फ की सिल्लियाँ पिद्घलने लगी थीं, जिनपर सैश लेटी थी। रो८ाी वाइपर से उसे सापफ करने में लग गई। ढेरों बुके लॉरी में रखे गए। ऐसा लगता था मानो किसी शिकारे पर पफूल बेचने के लिए लदे हों।
रात विलियम देर से लौटा और पिफलिप्स वहीं रह गया जहाँ सैश को ले गए थे। अब विलियम खाने की मेज पर बैठा था। उसकी इच्छा हुई कि ड्रिंक्स के लिए शुरूआत करे पर कौन उसे स्नैक्स देता। उसने शांति से खाना खाया और सोने चला गया। रो८ाी सो चुकी थी। सामंथा कुनमुना रही थी। द्घर से सैश को जिस अंदाज से विदा किया ऐसा लगा मानो वो पिफर से सैश को ले आएँगे। सैश की अंतिम यात्राा में अभी कसर थी। जिलाधिकारी तक यह सूचना पहुँच चुकी थी कि अब रोड्स कॉलोनी में किसी प्रदूषण या संक्रमण की संभावनाएँ नहीं रह गई थीं। विलियम सोने गया पर नींद आँखों से कोसों दूर थी। उसे याद आ रहा था वो स्वर्णिम समय जब उसने रो८ाी और पिफलिप्स की शादी के लिए सैश पर लगातार दबाव डाला। वो कंविस ही नहीं हो पा रही थी। एक जात बिरादरी से अलग क्रिश्चियन जिसको चर्च के पफादर ने मुश्किल से पाला। जहाँ मिशनरी की लाइब्रेरी थी वहीं तो पिफलिप्स उससे मिला था। वो रो८ाी की मासूमियत पर मुग्ध हो गया था। सैश को हमेशा आपत्ति रही उसकी संस्कृति और विरासत को लेकर। पिफर उसे खुश करने के लिए विलियम उसे क्लब ले जाने लगा। हर संडे कर्नल के साथ ब्रिज खेलते हुए उन्हें लगा कि एक सच्चा दोस्त या हमदर्द कितना जरूरी है।
एक शाम सैश मैरून लिपिस्टिक लगाकर अपने नाखूनों को पेंट करने बैठी। रहस्यमयी मुस्कान उसके चेहरे पर थी। अपने सौंदर्य में आत्ममुग्ध वो मोनालिसा सी लग रही थी। विलियम उस समय विक्रम सेठ की पुस्तक ''टू लाइव्ज'' लेकर बैठा था। उसे सैश की रहस्यमयी मुस्कान देखकर विंसी पर गुस्सा आया। जाने कहाँ-कहाँ से प्रेमीजन खिंचे चले आते हैं और उसने बहस शुरू कर दी सैश के सिंगार पर।
'क्या जरूरत है ओठों को पोतने की, पता है किस-किस जानवर की मज्जा और बोन से बनाते हैं लिपिस्टिक?'
'क्या जरूरत है किसी खूनी भेड़िये के शरीर की चीजों से क्या सजना, संवरना और खूबसूरत दिखना।'
'अच्छा! साथ ही एक्स्ट्रा मैरिटल संबंध पालना भी तो, जिसके प्रयोजन के लिए ये सिंगार किया जा रहा है।'
'क्या कहा? एक्स्ट्रा मैरीटल... पगला गए हो। इतने बरस हो गए मुझे आज तक नहीं पहचान पाए, समझ पाए। और हाँ मिस्टर विलियम! दोस्ती, प्यार, इ८ाहार, सब अलग-अलग चीजें हैं। तुम्हारे जैसे नहीं कि नौकरी के लिए विदेश गए और तीन चार रंगीन शामें डिस्कोथैक में गु८ाारीं, ८िांदगी के म८ो कर लिए। मैं ऐसी वैसी नहीं हूँ।''
सैश लगातार नकारती रही परंतु शक की दवा तो लुकमान के पास भी नहीं थी। अंततः विलियम ने मन ही मन में मान लिया कि सैश का जोर-जोर से झूठ बोलना उसे सच ठहराने के बराबर है। मन मार कर वो संबंधों को द्घसीटता रहा। दिन ब दिन झुंझलाता कभी उसे लगता नौकरी से रिटायरमेंट लेकर उसने गलत किया। सैश तो बैंक जाकर अपना समय बिता लेती पर वो... हमेशा किताबों में डूबा... ब्राउनिंग की ''लास्ट राइड'' पढ़ता, कभी नशे के गर्त में बड़बड़ाता।
सुबह के चार बज गए थे तभी कॉलबैल बजी। उठकर देखा तो पिफलिप्स हाँपफता सा खड़ा था। डैड जल्दी करो। रो८ाी को आवाज दी, सामंथा को गोद में लिया और ते८ाी से गाड़ी लेकर गोडाउन से माँ के ममीनुमा शरीर को चादर में लपेटा। सारा द्घर कार में उनींदा सा... उसी उनींदे परिवार में एक औरत जो पिछले चार दिन से इंतजार में थी। सभी जल्दी से ऊँची पहाड़ी पर पहुँचे। करीब पचास गिद्ध अपनी पैनी दृष्टि से कुएँ की मुंडेर पर तैयार बैठे थे जैसे सीमा पर सिपाही तैनात होते हैं। अंदर पड़ी दो तीन अधखबी लाशों में दीमकें भी लग चुकी थीं क्योंकि गिद्ध एक महीने से शहर से चले गए थे। किस ताकत और शक्ति से वो यहाँ पहुँचे पता नहीं, पर जैसे ही सैश का शरीर कुँए में उतारा, रोजी ने ८ाोर-८ाोर से रोना शुरू कर दिया। विलियम ने उसे इशारे से समझाया। सुगंधित इत्रा और क्रीम पाउडर से पुती चार दिन पुरानी देह जैसे ही तले में पहुँची सब के सब टूट पड़े उस पर। शरीर की खींचतान में विलियम ने देखा कि नीला पर्ल नैकलैस एक झटके से टूट गया। उसके सारे मोती इधर-उधर बिखर गए। वे सुबह की धुंध में हल्के से चमक रहे थे। अपने अंदर से मोनालिसा वाला प्रेम रहस्यमयी तरीके से दबाए सैश चली गई थी।
सामंथा कार में सोती रही। शाम जब विलियम दुबारा कुँए तक आया पिफलिप्स के साथ, उसने देखा नाममात्रा की सैश बची रह गई थी। वो लगभग अपने शरीर को द्घसीटता सा लौट रहा था एकदम टूटा हुआ। द्घर लौटकर उसने आँगन में कैक्टस देखा तो उसे लगा उसमें खिला पफूल, सैश का सुंदर खूबसूरत सा चेहरा है जिसे उसने अभी अभी संवारा है और वो कर्नल को रिझाने के लिए तैयार हो रही है। उसने एक झटके से पफूल तोड़ा और सैश की पफोटो पर चढ़ा दिया। उसकी आँखों में आँसू थे... छले जाने के। अपनी मृत पत्नी को उसने सिपर्फ उसकी इस इच्छा के कारण चार दिन तक द्घर में रखा रहा कि अगर गिद्ध न आएँ तो उसका मृत संस्कार न किया जाए, नहीं तो शरीर में दीमक द्घर बना लेंगे। मरने के दो दिन पहले ऐसी ही कुछ इच्छा व्यक्त की थी उसने। क्योंकि उसे पता था गिद्ध अब आते नहीं हैं। जब कभी उनका मन हो तो ही वो कुँए पर जुटते थे नहीं तो कितने उसके दोस्त और अपने थे जिनकी मृत देह पर दीमकों ने द्घर बना लिए थे। उसके प्यार के सोते को भी दीमक चाट गए थे। पर सैश के न रहने पर इतना खालीपन लगने लगा कि उसकी रहस्यमयी मुस्कान हर वक्त उसका पीछा करती, मानो सैश प्रेत योनि में चली गई हो और उसकी मुस्कान विलियम के चेहरे पर बुरी तरह चिपक गई थी।
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