जनवरी २०१०
 
 
 
   
 
 
 
• मनीषा कुलश्रेष्ठ को 'लमही सम्मान' • निदा फाजली को पद्मश्री सम्मान •देवेंद्र इस्सर नहीं रहे• ओड़िया लेखिका प्रतिभा रॉय को २०११ का ज्ञानपीठ पुरस्कार•चंद्रकांत देवताले को साहित्य अकादमी पुरस्कार • कुणाल सिंह को युवा साहित्य अकादमी सम्मान • तीसरा 'कृष्ण प्रताप कथा सम्मान' (२०१२) गीतांजलिश्री की कृति 'यहां हाथी रहते थे' को • रविशंकर को मरणोपरांत लाइफटाइम अचीवमेंट ग्रैमी पुरस्कार • विनोद कुमार शुक्ल को हिन्दी काव्य साहित्य में रचनात्मक योगदान के लिए 'परिवार' पुरस्कार • वरिष्ठ साहित्यकार कामतानाथ नहीं रहे
 
 
 
ख़बरनामा
साहित्य लिखना ही सच की तलाश

'जब तक सच की तलाश जारी रहेगी तब तक साहित्य लिखा जाता रहेगा।' उक्त विचार प्रख्यात आलोचक देवेन्द्र इस्सर ने हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा २७ नवंबर को आयोजित संगोष्ठी 'साहित्य क्यों?' पर अपने अध्यक्षीय भाषण में कहे। उन्होंने आगे कहा कि सच पारे की तरह होता है जो लगता तो है पकड़ में आ रहा है लेकिन पकड़ में आता नहीं है। उन्होंने अपने समय को याद करते हुए कहा कि हम साहित्य से दुनिया बदलने का सपना देखते थे। लेकिन हम बदल गए, दुनिया नहीं बदली।




साहित्य अकादमी के सचिव और प्रसि( कन्नड़ लेखक श्री अग्रहार कृष्णमूर्ति ने बारहवीं शताब्दी के कवि कुमारव्यास की उन पंक्तियों का हवाला दिया जिन्हें आपातकाल के दौरान प्रयोग में लाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अच्छा साहित्य वही है जो विभिन्न कालखण्डों में भी अपनी बात उसी सच्चाई से कह सके। मलयालम के प्रसि( लेखक बशीर की दो कहानियों के उदाहरण से उन्होंने समझाया कि जैसे हर कोई अच्छा साहित्य नहीं लिख सकता वैसे ही अच्छा साहित्य पढ़ने वाला भी हर कोई नहीं होता। लेकिन इतना अवश्य है कि साहित्य पढ़ने वाले कभी दुखी नहीं होते। पंजाबी अकादमी के सचिव डॉ. रवेल सिंह ने साहित्य को ऐसा उपकरण बताया जिसके जरिए पाठक एक ऐसी अनदेखी दुनिया की सैर कर सकते हैं जिसका लेखा-जोखा साहित्यकार ने कापफी श्रम से तैयार किया होता है।
उर्दू अकादमी दिल्ली के सचिव श्री मरगूब हैदर आबिदी ने कहा कि आज की मशीनी दुनिया में हम साहित्य कम लिख रहे हैं और उसको पढ़ने वाले भी कम हो रहे हैं, लेकिन साहित्य समाज की प्रगति के लिए जरूरी है। जंग और नपफरत को रोकने का काम साहित्य ही कर सकता है। सिंधी अकादमी की सचिव श्रीमती सिंधु भागिया मिश्रा ने सभी कलाओं का आधार साहित्य को बताते हुए कहा कि साहित्य से इसमें अनुभूति पैदा होती है। इंसां होना साहित्य से ही संभव है। इससे पहले हिन्दी अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. अशोक चक्रधर ने कहा कि लिखने के बाद साहित्य लेखक का नहीं रहता बल्कि वह एक ताकत के रूप में पाठक के पास चला जाता है। जब तक इंसान से जुड़ा साहित्य लिखा जाता रहेगा वह जिंदा भी रहेगा और लोकप्रिय भी होगा। हिन्दी अकादमी और मैथिली-भोजपुरी अकादमी के सचिव डॉ. रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव 'परिचय दास' ने कार्यक्रम के प्रारम्भ में बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि साहित्य केवल सम्प्रेषण नहीं है बल्कि आत्मीय सम्प्रेषण है। साहित्य का लक्ष्य निष्कर्ष पर पहुँचना नहीं होता। साहित्य जीवन अनुभव को अनुभूति में बदलने का कार्य करता है जो एक नई सृष्टि का निर्माण करता है।

 
निशांत को नागार्जुन कृति सम्मान
 
दरभंगा, बिहार में दो दिवसीय राष्ट्रीय युवा समागम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें युवा कवि निशांत को वर्ष ०९ के लिए नागार्जुन कृति सम्मान से पूर्व सांसद डॉ. अरूण कुमार ने सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि युवाओं की रचनात्मकता को रेखांकित करने की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण सम्मान है। निशांत को यह सम्मान उनकी पहली काव्य कृति 'जवान होते हुए लड़के का कबूलनामा' के लिए प्रदान किया गया। वरिष्ठ आलोचक डा. नित्यानंद तिवारी की अध्यक्षता में गठित निर्णायक समिति ने निशांत को सम्मान प्रदान करने का निर्णय लिया। सम्मान के रूप में उन्हें ५१०० की राशि, शॉल, प्रमाणपत्रा एवं स्मृतिचिन्ह दिया गया। यह सम्मान साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था 'मीमांसा एक पहल' की ओर से प्रतिवर्ष किसी युवा कवि को उनकी पहली कृति के लिए दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त उक्त समारोह में प्रदीप कौशिक, विजेन्द्र एस विज, अजय प्रताप सिंह, डॉ. मिथिलेश झा को भी युवा गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर 'सामयिक मीमांसा' के युवा विशेषांक का लोकार्पण किया गया।
 
प्रतिनिधि कविता संग्रह का लोकार्पण
 
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित मलयालम के सुप्रसि( कवि अक्कितम की प्रतिनिध्ि कविताओं का हिन्दी में अनूदित संग्रह 'अक्कितम की प्रतिनिध्ि कविताएँ' का लोकार्पण २९ अक्टूबर को कालीकट में किया गया। कवि अक्कितम की कविताओं का अनुवाद कवि उमेश चौहान द्वारा किया गया एवं प्रकाशन भारतीय ज्ञानपीठ ने किया। उक्त पुस्तक का लोकार्पण सुप्रसि( मलयालम लेखक एम टी वासुदेवन नायर द्वारा किया गया। इस अवसर पर स्वयं कवि अक्कितम नम्बूदिरी ने उमेश चौहान को शॉल भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का आयोजन भाषा समन्वय वेदी द्वारा किया गया।
 
शैलेय को आचार्य निरंजननाथ सम्मान
 
राजसमंद, राजस्थान में ११वां प्रतिष्ठित आचार्य निरंजननाथ सम्मान ०९ युवा कवि शैलेय को उनके चर्चित कविता संग्रह 'या' पर प्रदान किया गया। अणुव्रत विश्व भारती, राजसमंद के भागीरथी सभागार में गत ८ नवम्बर को आयोजित एक भव्य समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार मध्ुसूदन पांड्या, प्रो. नंद चतुर्वेदी, डा. महेन्द्र भानावत, डा. भगवती लाल व्यास, 'संबोध्न' के सम्पादक कमर मेवाड़ी व कर्नल देशबंधु आचार्य ने संयुक्त रूप से शैलेय को सम्मान स्वरूप शॉल, श्रीपफल, प्रशस्तिपत्रा, प्रतीकचिन्ह सौंपे। साथ ही उन्हें इक्कीस हजार रुपये की नकद धनराशि भी भेंट की गई।
सम्बोध्न के संपादक व संयोजक कमर मेवाड़ी ने बताया कि इस बार सम्मान के निर्णायक मण्डल में प्रसि( वरिष्ठ कवि विष्णु खरे, समीक्षक राजाराम भादू तथा कवि-कथाकार भगवतीलाल व्यास थे।
 
मौर्य को मंडलोई पुरस्कार
 
युवा कवि शिरीष कुमार मौर्य को वर्ष ०९ के लक्ष्मण प्रसाद मंडलोई पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार उन्हें उनके कविता संग्रह 'पृथ्वी पर एक जगह' के लिए देने की द्घोषणा की गई है। 'वसुध' पत्रिाका के सहयोग से यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष ४० साल की उम्र तक के युवा कवि को उनके कविता संग्रह के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार की निर्णायक समिति में कवि विष्णु नागर, चंद्रकांत देवताले और अरूण कमल हैं। २३ जनवरी को छिंदवाडा, ;मध्यप्रदेशद्ध में आयोजित होने वाले एक समारोह में यह पुरस्कार दिया जाएगा।
 
'आजाद हिन्दुस्तान में मुसलमान'
 
भारतीय मुसलमानों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात को बयां करती लेखक, पत्राकार, समीक्षक जाहिद खान की किताब का लोकार्पण भोपाल में आलोचक नामवर सिंह ने किया। कार्यक्रम में मंच पर डॉ. नामवर सिंह के अलावा कवि आलोचक विजय कुमार, चन्द्रकांत देवताले, भगवत रावत, पूर्णचंद्र रथ और राजेश जोशी मौजूद थे।
कॉन्फ्रलुएंस इंटरनेशनल प्रकाशन से प्रकाशित यह किताब लेखक जाहिद खान के लेखों का संग्रह है और उनके ये लेख गुजिश्ता तीन सालों में मुख्तलिपफ पत्रा-पत्रिाकाओं में प्रकाशित हो, चर्चा में रहे हैं। किताब में अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों के अलावा साम्प्रदायिकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्राता के सवालों की भी गहन पड़ताल की गई है। मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन भोपाल, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा एवं साहित्य भंडार इलाहाबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में समकालीन कविता पर एक संगोष्ठी और पुरस्कार वितरण के अलावा लोकार्पण कार्यक्रम भी संपन्न हुआ। समारोह में प्रगतिशील लेखक संद्घ के राष्ट्रीय महासचिव डा. कमला प्रसाद, आग्नेय, लीलाध्र मंडलोई, राजेन्द्र शर्मा, कुमार अंबुज, दिनेश कुशवाह, सत्यनारायण पटेल आदि मौजूद थे।
 
स्त्रिायों के लिए 'मिलजुल मन'
 
वरिष्ठ कथाकार राजेन्द्र यादव ने कहा कि पहले स्त्रिायां पुरुषों के लिए कथा, कहानी लिखती थीं ताकि वह पढ़कर उसे सराहें। अब स्त्राी की दृष्टि से स्त्रिायों के बारे में उपन्यास लिखा जा रहा है। मृदुला गर्ग का उपन्यास 'मिलजुल मन' ऐसी ही रचना है। यह कथन उन्होंने दिल्ली में उपन्यास के लोकार्पण समारोह में बतौर अध्यक्ष कहे। समारोह की मुख्य अतिथि वरिष्ठ आलोचक प्रो. निर्मला जैन ने इस उपन्यास को सहज और पठनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह लेखिका का विभिन्न तरह के विमर्शों, बाजारवाद और भूमंडलीकरण के बोझों से मुक्त विशु( सर्जनात्मक प्रयास है। लोकार्पण के इस अवसर पर कथाकार विजयमोहन सिंह, विक्रम सिंह, गीतांजलिश्री ने अपनी विशिष्ठ उपस्थिति दर्ज की। कार्यक्रम में मृदुला गर्ग ने अपनी रचना के कुछ अंश पढ़कर भी सुनाए। इस कार्यक्रम का आयोजन सामयिक प्रकाशन ने किया था तथा संचालन महेश भारद्वाज ने।
 
अट्टहास शिखर सम्मान
 
लखनउफ में आयोजित होने वाले लखनउफ महोत्सव में २९ नवंबर को प्रसि( व्यंग्य लेखक और कवि डॉ. शेरजंग गर्ग को अट्टहास शिखर सम्मान तथा युवा व्यंग्य कवि संजयन झाला को अट्टहास युवा सम्मान ०९ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रसि( साहित्यिक संस्था 'माध्यम' के निर्णायक मंडल की बैठक मे लिया गया था। इन पुरस्कारों के अतिरिक्त 'हरिशंकर परसाई स्मृति सम्मान' युवा लेखिका अलका पाठक को दिया गया। सम्मान समारोह के बाद अखिल भारतीय हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया।
 
कबीर की कविता और उनका समय
 
वरिष्ठ आलोचक नित्यानंद तिवारी ने कहा कि 'पफैशनपरस्त उत्तर आध्ुनिकता सुविधनुसार किसी भी तरपफ जा सकती है, पर पुरुषोत्तम अग्रवाल ने अपनी पुस्तक में यह सुविध नहीं ली है। पुरुषोत्तम की लड़ाई ज्यादा कठिन है क्योंकि आज का वक्त भी कठिन है। पहले तो चेतना की लड़ाई थी पर अब अस्तित्व की लड़ाई है- कि कविता है या नहीं है।' यह वक्तव्य उन्होने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में पुरुषोत्तम अग्रवाल की पुस्तक 'अकथ कहानी प्रेम की, कबीर की कविता और उनका समय' पर रजा पफाउंडेशन की ओर से आयोजित चर्चा में हिस्सा लेते हुए दिया। २९ नवंबर को आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत में कवि अशोक वाजपेयी ने कहा कि नारी को लेकर कबीर की जो दृष्टि है उसका बहुत अच्छा विश्लेषण पुरुषोत्तम ने किया है। कवयित्राी अर्चना वर्मा ने इस अवसर पर कहा कि पुस्तक की शुरूआत ही पाठक के औपनिवेशिक दृष्टिकोण के उपचार से होती है। यह किताब इतिहास और इतिहास की बहस की नहीं, बल्कि कबीर से पाठक की मुलाकात कराने वाली है। आलोचक मदन सोनी, इतिहासकार डॉ. सुध्ीर चंद्र आदि ने अपने महत्वपूर्ण विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में पुरुषोत्तम अग्रवाल ने बताया कि किन बेचैनियों से गुजरते हुए वे इस पुस्तक को लिखने के लिए मजबूर हुए।
 
संवेदना मात्रा रचना नहीं
 
हिन्दुस्तानी एकेडमी, इलाहाबाद के तत्वावधन में हिन्दुस्तानी एकेडमी के पूर्व अध्यक्ष जनकवि एवं व्यंग्यकार स्व. कैलाश गौतम की पुण्य तिथि को 'कैलाश गौतम स्मृति दिवस' के रूप में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाध्किारी संजय प्रसाद ने कहा कि कैलाश गौतम को इस मंच के माध्यम से मैं श्र(ांजलि अर्पित करता हूँ। हमारे समाज में जो सांप्रदायिक जहर है उनके प्रति कवि की संवेदना मात्रा रचना नहीं है। कवि की वाणी में, लेखनी में हर वर्ग के लिए कोई संदेश होता है। रचनाएँ शक्ति प्रदान करती हैं। इस अवसर पर गीतकार यश मालवीय ने अपनी बात 'तुम गंगा के देवव्रत थे, तुम यमुना के बंध्ु जैसे थे' पंक्तियों के द्वारा कही। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गाजियाबाद से पधरे कवि एवं मंच पर अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराने वाले डॉ. कुमार विश्वास का एकल काव्यपाठ रहा। अपनी कविताओं में उन्होंने आदमी की आम संवेदनाओं के विविध् रूपों को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शिवगोपाल मिश्र ने की।
 
भगत सिंह एक विचार का नाम
 
१२ दिसंबर को दिल्ली में भगत सिंह पर चर्चा और प्रेमचंद सहजवाला की पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। पुस्तक 'भगत सिंह : इतिहास के कुछ और पन्ने' का अनावरण साहित्यकार एवं आलोचक भारत भारद्वाज, प्रो. चमन लाल, विभूति नारायण राय तथा हिमांशु जोशी ने किया। यह पुस्तक हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया से पहली ऐसी पुस्तक हैं जो किसी खास विषय पर केंद्रित है और पहले ब्लॉग पर सिलसिलेवार ढंग से प्रकाशित है। इस पुस्तक के सभी १३ अध्याय पहले हिन्द युग्म पर प्रकाशित हैं। इस कार्यक्रम में 'बदलते दौर में युवा चेतना और भगत सिंह की परम्परा' विषय पर गोष्ठी भी सम्पन्न हुई। मुख्य अतिथि विभूति नारायण राय ने इस विषय पर बोलते हुये कहा कि भगत सिंह होना एक खास तरह का सपना देखना है। भगत सिंह एक दर्शन, एक विचार का नाम है। सहजवाला ने इस पुस्तक को लिखकर हिन्दी में एक कमी काे पूरा किया है। कार्यक्रम में अल्का सिन्हा, सुनीता चोटिया, शैलेश भारतवासी, मुनव्वर सरहदी, रामजी यादव, रंजीत वर्मा आदि उपस्थित थे।
 
राकेश रंजन को सम्मान
 
युवा कवि राकेश रंजन को उनके कविता संग्रह 'चांद में अटकी पतंग' के लिए वर्ष ०९ का हेमंत स्मृति कविता सम्मान तथा चर्चित लेखक राजू शर्मा को उनके उपन्यास 'विसर्जन' के लिए ०९ का विजय वर्मा कथा सम्मान दिए जाने की द्घोषणा हेमंत पफाउंडेशन की प्रबंध् न्यासी कथाकार संतोष श्रीवास्तव तथा सचिव कथाकार प्रमिला वर्मा ने की। हेमंत पफाउंडेशन के महासचिव कवि आलोक भट्टाचार्य ने बताया कि २ जनवरी २०१० को मुबई में आयोजित भव्य समारोह में ये पुरस्कार प्रदान किए जाएँगे। पुरस्कार के अन्तर्गत ११००० रुपये की सम्मान राशि के साथ शॉल व स्मृतिचिन्ह प्रदान किए जाएँगे।
 
मुरारी शर्मा को रमाकांत स्मृति पुरस्कार
 
'मैं एक अजीब खिंचाव के तहत रमाकांत स्मृति कहानी पुरस्कार समारोह में लगातार शामिल होता रहा हूँ। यह मेरी इमोशनल मजबूरी है। हमें गर्व है कि हमने रमाकांत की सर्वश्रेष्ठ कहानी 'कार्लो हब्शी का संदूक' हंस में प्रकाशित की।' यह बात वरिष्ठ कहानीकार राजेन्द्र यादव ने बारहवें रमाकांत स्मृति कहानी पुरस्कार समारोह में युवा कथाकार मुरारी शर्मा को सम्मानित करते हुए कही। यह पुरस्कार मुरारी शर्मा की हंस में प्रकाशित कहानी 'बाणमूठ' के लिए प्रदान किया गया। यह पुरस्कार हर साल २ दिसंबर को प्रसि( साहित्यकार रमाकांत की जयंती पर किसी युवा रचनाकार को दिया जाता है। इस बार यह आयोजन ३ दिसबंर को गाँध्ी शांति प्रतिष्ठान, दिल्ली में सम्पन्न हुआ। अब तक इस पुरस्कार के तहत ११ कथाकार पुरस्कृत हो चुके हैं।
 
व्यंग्य को आलोचना की बैसाखी की जरूरत नहीं
 
लखनउफ में ३० नवंबर को हिन्दी व्यंग्य एवं आलोचना पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न हुई। संगोष्ठी का विषय 'हिन्दी व्यंग्य साहित्यिक आलोचना की परिध्ि से बाहर तो है?' था। यह संगोष्ठी उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान और माध्यम साहित्यिक संस्थान की ओर से अट्टहास समारोह के अन्तगर्त आयोजित की गई थी। राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरूआत प्रख्यात व्यंग्यकार के पी सक्सेना की चर्चा से शुरू हुई। उन्होंने कहा कि हिन्दी आलोचना को अब व्यंग्य विधा को गंभीरतापूर्वक लेना चाहिए। 'अब व्यंग्य को आलोचना की बैसाखी की जरूरत नहीं है।' अपने विचार रखते हुए हिन्दी संस्थान के निदेशक डॉ. सुधकर अदीब ने कहा कि अगर व्यंग्य लेखन में गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए तो हमें आलोचना से द्घबराना नहीं चाहिए। महेश चन्द्र द्विवेदी का कहना था कि हास्य और व्यंग्य अलग-अलग हैं इनको परिभाषित करने की आवश्यकता है। इस गोष्ठी में देश के जाने माने साहित्यकार गिरीश पंकज, अरविन्द तिवारी, बु(निाथ मिश्र, विद्याबिन्दु सिंह, महेन्द्र ठाकुर आदि उपस्थित थे। संगोष्ठी की अध्यक्षता सुप्रसि( व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी ने की।
प्रस्तुति : प्रतिभा कुशवाहा
 
 
 
 
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