जनवरी २०१०
 
 
 
   
 
 
 
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तीसरा नेत्र
द्रौपदी का स्वयंवर : रवीन्द्र त्रिपाठी

महाराजा द्रुपद परेशान और चिंतित थे। उनको समझ में नहीं आ रहा था क्या किया जाए। राज्य की माली हालत बड़ी खराब हो चुकी थी। कर्मचारियों को वेतन देने के लिए सरकारी खजाने में पैसा नहीं था। विकास का काम भी नहीं हो रहा था। सड़कें टूटी पफूटी हालत में थीं और उनकी मरम्मत के लिए जरूरी पैसा भी नहीं था। राज्य के सारे नेशनल हाइवे ध्वस्त हो चुके थे। दूसरे राज्यों से जो कर्जे लिए थे उनकी मासिक किस्तें कई महीनों से चुकाई

महाराजा द्रुपद परेशान और चिंतित थे। उनको समझ में नहीं आ रहा था क्या किया जाए। राज्य की माली हालत बड़ी खराब हो चुकी थी। कर्मचारियों को वेतन देने के लिए सरकारी खजाने में पैसा नहीं था। विकास का काम भी नहीं हो रहा था। सड़कें टूटी पफूटी हालत में थीं और उनकी मरम्मत के लिए जरूरी पैसा भी नहीं था। राज्य के सारे नेशनल हाइवे ध्वस्त हो चुके थे। दूसरे राज्यों से जो कर्जे लिए थे उनकी मासिक किस्तें कई महीनों से चुकाई नहीं गई थीं। शेयर मार्केट भी गिर रहा था। हालात इतने खराब हो रहे थे कि महाराज द्रुपद को अपने द्घर का खर्च चलाने के लिए पुराने पिफक्स्ड डिपोजिट तोड़ने पड़ रह थे। यानी वे अपना वेतन भी नहीं ले पा रहे थे। कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा था वे किस मुँह से पैसा लेते।

द्रुपद अपने मंत्रिायों से भी मंत्राणा कर चुके थे कि इस संकट से निकलने के लिए क्या किया जाए। लेकिन उनके मंत्रिायों के पास भी कोई आइडिया नहीं था। ऐसे में आज के जमाने में जो हो रहा है वैसा ही उस वक्त भी हुआ। जैसे आजकल संकट की द्घड़ी में नेताओं को अपने बेटे बेटी ही काम आते हैं वैसा ही उस जमाने में भी हुआ। द्रुपद का बेटा तो बहुत तेज नहीं था लेकिन बेटी द्रौपदी मेधावी और स्मार्ट थी। द्रौपदी की व्यवसाय बु(ि बड़ी तेज थी। उसने बिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स भी कर रखा था। उसने द्रुपद से कहा कि मेरे पास एक आइडिया है। अगर इसको अमली जामा पहना दिया जाए तो न सिपर्फ राज्य को कापफी लाभ होगा बल्कि आपका और मेरा बैंक बैलेंस भी अरबों का हो जाएगा। प्रचार- प्रसार का जो लाभ होगा सो अलग। द्रुपद ने पूछा कि आइडिया क्या है। द्रौपदी ने कहा-'डैड, मेरा स्वंयवर कर दीजिए।'
सुनकर द्रुपद को पहले तो हँसी आई पिफर गुस्सा भी आ गया। बोले- बेटी मैं तो तुमको बु(मिान समझ रहा था लेकिन तू क्या बोल रही है। अरे तुम्हारे स्वंयवर के लिए धन कहाँ है मेरे पास। मैं तो तुम्हारे लिए गहने कपड़े भी नहीं बनवा सकता। अब तुम राजा की बेटी हो तो तु्‌म्हें साधारण कपड़ों में तो विदा नहीं कर सकता। डिजाइनर कपड़ा चाहिए। सुनता हूँ कि आजकल लहंगा भी इतना मंहगा हो गया है कि एक-एक करोड़ का आ रहा है। पिफर स्वयंवर होगा तो इतने बड़े पैमाने पर लोगों को खिलाना- पिलाना। दहेज भी देना होगा। आखिर राजा की बेटी का विवाह किसी कंगाल से तो होगा नहीं। किसी न किसी राजकुमार को ही ढूंढ़ना होगा। छोटे से राज्यों के राजकुमार को भी आजकल करोड़ो रुपए दहेज देने पड़ते हैं। लेकिन दहेज कहाँ से दूँगा, मैं तो दिवालिया हो चुका हूँ। स्वयंवर तो क्या, मैं साधारण ढंग से भी शादी नहीं कर सकता। ना बेटी ना, अभी तो कुछ साल तक तुम्हारी शादी नहीं कर सकता। अगर तुम किसी से शादी करना ही चाहती हो तो किसी से कोर्ट मैरेज कर लो।'

द्रोपदी हँसी, पिफर बोली- 'क्या डैडी, आप भी जमाने के साथ नहीं चल रहे हैं। अरे मैंने, बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई ऐसे ही थोड़े की है। और डैडी, आपने वो विज्ञापन भी नहीं देखा है जिसमें एक स्कूल में पढ़ने वाली लड़की अपने डैडी को नई कार खरीदने के लिए पैसे देती है। वो इसलिए कि उस लड़की को ये मालूम है कि किस वक्त कैसे और कहाँ इनवेस्टमेंट करना चाहिए। असल में डैडी आप टीवी नहीं देखते, इसलिए पुराने जमाने के लोगों की तरह सोचते हैं। इसलिए पहले मेरा प्लान सुनिए।'
सच में द्रुपद टीवी नहीं देखते थे। कभी-कभी सरकारी टीवी पर अपनी जनता को संदेश दे देते थे। उसके प्रसारण के वक्त वे जरूर देखते थे कि जो कहा वो ठीक ठीक लोगों के बीच गया या नहीं। उसके बाद वे कभी टीवी नहीं देखते थे। कभी- कभार पिफल्में जरूर देख लेते थे। लेकिन सीरियल वगैरह में उनकी दिलचस्पी नहीं थी।
द्रौपदी ने कहा- 'डैडी, आपको मेरे स्वयंवर के लिए एक पैसा भी नहीं खर्च करना पड़ेगा। आप सिपर्फ सरकारी आदेश जारी कर दीजिए और बाकी सब कुछ मुझे करने दीजिए। सारे मंत्रिायों और अपफसरों को कह दीजिए कि इस स्वयंवर से सरकारी खजाने को लाभ पहुँचेगा और निजी रूप से उनको भी।'
द्रुपद को पिफर भी अंदेशा था। एक तो राजा थे इसलिए और दूसरे इस कारण कि युवा पीढ़ी पर ज्यादा भरोसा करना उनकी आदत नहीं थी। हालांकि खुद उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि राज्य की आर्थिक हालत कैसे बेहतर की जाए, लेकिन भीतर ही भीतर इस बात को स्वीकार भी नहीं करना चाहते थे कि जवान लड़की के पास कोई बेहतर आइडिया हो सकता था। बेटी ने मैनेजमेंट का कोर्स किया था, इससे क्या हुआ, मैनेजरों पर सब कुछ थोड़े छोड़ा जा सकता था। लेकिन राजा को संतान से अतिररिक्त प्रेम होता ही है इसलिए झिझकते हुए और समझाने की मुद्रा में बोले- 'लेकिन बेटी'

द्रौपदी ने बीच में ही रोक दिया- 'प्लीज डैडी, ये लेकिन-पफेकिन, अगर-मगर, इपफ-बट वगैरह वगैहर मत कीजिए। आप मेरे पास बैठिए। मेरे पास पूरा प्लान है। आप मेरे पास बैठिए।'
द्रुपद उनके बगल में आके बैठ गए। द्रौपदी ने अपना लैपटॉप खोला और पिफर बोलना शुरू किया- 'डैडी, आपको सिपर्फ ये सरकारी आदेश जारी करना है कि मेरी बेटी द्रौपदी का स्वयंवर होगा और इसकी पूरी प्रक्रिया दो महीने तक चलेगी। इस स्वयंवर को निजी चैनलों पर प्रसारित किया जाएगा और प्रसारण का अधिकार उस चैनल को दिया जाएगा जो सबसे ज्यादा बोली लगाएगा। इस तरीके से होने वाली आय को सरकारी खजाने में जमा किया जाएगा और उस पैसे से राज्य का विकास किया जाएगा'
द्रुपद मुँह खोलने की कोशिश कर रहे थे कि बेटी ने बीच में ही टोका- 'पहले आप पूरा प्लान तो सुन लीजिए। मेरा स्वयंवर दो महीने तक लगेगा और सबसे ज्यादा बोली देने वाले चैनल पर प्राइम टाइम यानी रात आठ बजे से नौ बजे तक चलेगा। दूसरे दिन दोपहर तीन बजे इसका रि-टेलिकास्ट होगा। स्वयंवर के दौरान कई गेम होगें जिनको अलग अलग कंपनियां स्पौंसर करेंगी जिससे कई सौ करोड़ की आय होगी। स्वयंवर में देश विदेश के राजकुमार भाग लेंगे। सबसे इंट्री पफी के रूप में दस- दस करोड़ रुपए लिए जाएँगे'
द्रुपद से रहा नहीं गया। बोले- 'लेकिन बेटी। इतनी मोटी रकम कौन देगा? सारी दुनिया जानती है कि मेरे पास न तुम्हें देने के लिए कुछ है न दामाद को देने के लिए। ऐसे तो कोई राजकुमार स्वयंवर में आ भी जाए, लेकिन दस दस करोड़ देकर तो शायद कोई न आए। कहीं ऐसा न हो कि इस तरह के आदेश जारी करने के बाद मेरी पफजीहत हो जाए और मैं कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं रहूँ। ऐसे में तो राज्य में तख्ता पलट भी हो सकता है।'

'डोंट वरी डैडी', द्रौपदी रौ में बोलती चली गई, 'मैंने सब कुछ सोच लिया है। सुना है कि आजकल पांडव किसी जंगल में हैं। अखबारों या चैनलों में खबर चलवानी पड़ेगी कि वे भी इस स्वंयवर में आ रहे हैं। पिफर देखिए दुर्योधन से लेकर दुश्शासन तक दौड़े चले आएँगे। पिफर कर्ण भी आएगा। ऐसे में बर्तन भाड़े बेचकर अर्जुन समेत पाँचों भाइयों को भी आना पड़ेगा क्योंकि उनकी भी इज्जत का सवाल बन जाएगा। मेरा स्वयवंर तो ऐसा हिट होगा कि आगे भी दुनिया में कोई स्वयंवर ऐसा नहीं होगा, इतना तो मैं दावे के साथ कह सकती हूँ। और कोई सवाल डैड?'
द्रुपद के चेहरे पर चमक लौटने लगी थी। उनको लग रहा था कि जैसा सोच रहे थे वैसा नहीं है। बेटी की बातों में उनको दम दिखाई देने लगा था। पिफर वे अपनी ही तारीपफ करने के मूड में आ गए-'मैं तो इसीलिए सबसे कह रहा था कि द्रौपदी कुछ न कुछ रास्ता तो निकाल ही लेगी। आखिर बेटी किसकी है? लेकिन बेटी ये बताओ कि इसमें अपना क्या पफायदा होगा, सारा पैसा तो सरकारी खजाने में ही चला जाएगा?'
द्रौपदी बोली- 'पहला पफायदा तो मुझे होगा कि किसी ठीक ठाक और पसंद के लड़के से शादी हो जाएगी। लेकिन आपके तो पफायदे ही पफायदे हैं। जैसे मेरी शादी में आपको एक पफूटी कौड़ी भी नहीं खर्च करनी पड़ेगी। मेरे स्वयंवर के लिए आपका महल भी सज संवर जाएगा जो कि बरसों से बिना रंगाई- पुताई के खंडहर जैसा होता जा रहा है। स्वयंवर के प्रसारण से जनता का भरपूर मनोरंजन होगा जिससे आप जनता के बीच लोकप्रिय हो जाएँगे।'

द्रौपदी ने कॉपफी की एक द्घूंट ली पिफर आगे कहा- 'और डैडी आपके बैंक बैलेंस का भी ध्यान रखा जाएगा। कुछ राजकुमारों से इंट्री के लिए ह्वाइट के अलावा ब्लैक में भी रकम ली जाएगी जिसमें आपका और मेरा शेयर होगा। अब ये पूछिएगा मत कि ये राजकुमार ब्लैक में पैसा क्यों देंगे?' वो इसलिए देंगे कि अर्जुन और दुर्योधन जैसे राजकुमारों के बगल में स्यवंवर में बैठने के लिए लोग दस तो क्या एक एक अरब तक दे देंगे। आपको मालूम नहीं कि रिएलिटी शो में कई लोग चैनलों को पैसे देकर आते हैं ताकि उनकी पहचान बन जाए। इसलिए छोटे छोटे राज्यों के राजकुमारों से ह्वाइट के अलावा ब्लैक में भी पैसा लिया जाएगा।' द्रुपद कुछ ज्यादा ही उत्साहित नजर आ रहे थे। वे उठने लगे कि द्रौपदी ने उनको रोका और कहा 'अभी मेरी बात खत्म नहीं हुई है डैड। मैं आपको ये बताना चाहती हूँ कि एक और तरीके से पैसा आएगा। इसमें एसएमएस का भी खेल होगा। यानी हर रात एपिसोड के आखिर में दर्शकों से सवाल पूछा जाएगा और उनको जवाब में एसएमएस करने को कहा जाएगा। हम मोबाईल की कंपनियों से बात करेंगे। उनको भी कुछ पैसा ह्वाइट मे देना पड़ेगा और बाकी ब्लैक में। ह्वाइट का पैसा सरकारी खजाने में और ब्लैक का मेरे और आपके खजाने में। यानी ब्लैक का अस्सी परसेंट मेरा और बीस परसेंट आपका। मंजूर?'

मंजूर, मंजूर कहते हुए द्रुपद खुद मिठाई खाने लगे, हालांकि डायबिटीज की वजह से डॉक्टरों ने उनको मिठाई खाने से मना किया था। लेकिन उनके दिल में खुशी की हिलोरें मचल रही थीं। कहने की जरूरत नहीं कि द्रुपद को भरोसा हो गया था कि द्रौपदी की योजना सपफल होगी। उन्होंने उसी दिन सरकारी आदेश जारी कर दिया। तय किया गया कि प्रसारण के लिए हजार करोड़ से उपर की बोली लगेगी। यानी जो हजार करोड़ से सबसे ज्यादा की बोली लगाएगा उसे स्वंयवर के प्रसारण के अधिकार दिए जाएँगे। पर आदेश से मनोरंजन चैनलों को लगा कि ये बहुत ज्यादा रकम है। वे स्वयंवर के आइडिया को लेकर तो उत्साहित थे और उनको लग रहा था कि इससे उनकी रेटिंग में भारी बढ़ोतरी होगी। लेकिन ये भी लग रहा था कि रेटिंग इतनी नहीं बढेग़ी कि हजार करोड़ से ज्यादा की बोली लगाई जाए। इसलिए सभी चैनलों के सीईओ का प्रतिनिधिमंडल द्रुपद से मिला और कहा रकम बहुत ज्यादा है। उनका ये भी कहना था कि बोली पचास करोड़ से शुरू होनी चाहिए क्योंकि एक स्वयंवर के लिए इतने ज्यादा विज्ञापन नहीं मिलेंगे कि हजार करोड़ से ज्यादा रकम सरकारी खजाने में जमा करने के बाद उनको भी लाभ हो। मसले की गंभीरता को देखते हुए द्रुपद ने बैठक में द्रौपदी को भी बुला लिया। सभी सीईओ के बोल चुकने के बाद वे द्रौपदी की तरपफ मुड़े और बोले-'तुम्हारा क्या कहना है बेटी?'

सच पूछा जाए तो द्रुपद थोड़े नर्वस होने लगे थे। उनके दिल में ये डर सताने लगा था कि कहीं सब कुछ गड़बड़ न हो जाए और खुद उनका मुनापफा कम न हो जाए। उनकी सारी आशाएँ द्रौपदी पर टिकी थीं।
द्रौपदी ने अपने लैपटॉप पर नजर डाली और पिफर सबकी तरपफ देखती हुई बोली- 'दरअसल हजार करोड़ की रकम तो बहुत कम है। मैं अगर आप लोगों की जगह होती तो पाँच हजार करोड़ चुका भी प्रसारण अधिकार खरीदना होता, तो खरीद लेती।'
एक सीईओ ने बीच में टोका -'हमने भी कैलकुलेशन किया है और हमारा भी अनुभव है। आपने तो सिपर्फ बिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स किया है लेकिन हम तो कई सालों से बिजनेस कर रहे हैं...'
टोकते हुए द्रौपदी तीखे लहजे में बोली- 'लेट मी पिफनिश.. आप लोगों का कैलकुलैशन होगा। जरूर होगा। ये भी माना कि आप लोगों के पास बिजनेस का तजुर्बा भी है। लेकिन मुझे आप लोगों के कैलकुलेशन के बारे में कुछ नहीं कहना है और मैं सिपर्फ अपनी बात करूँगी और सिपर्फ ये कहूँगी कि जेंटलमेन, आप लोगों में चैलेंज स्वीकार करने की ताकत नहीं है। मैं तो सिपर्फ इतना कहूँगी कि अगर मैं आपकी जगह होती तो ये अधिकार पाँच हजार करोड़ की कीमत चुकाकर भी खरीद लेती। असल में आपको नहीं पता कि मैं क्या करने वाली हूँ। मैं आपको बता दूँ कि इस स्वयंवर में मैं एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं बल्कि पाँच पति चुनने वाली हूँ। हुआ है आज तक कोई ऐसा स्वयंवर? या आगे कभी ऐसा होगा? नहीं, आगे कभी नहीं होगा। इसलिए ऐसा प्रसारण भी भविष्य में कभी नहीं होगा।'

सभी सीईओ सकते में थे। खुद द्रुपद सन्न रह गए। उनके मंत्राी और बैठक में मौजूद अधिकारियों को तो जैसे साँप सूँद्घ गया था। उन सबको नजरों से तौलते हुए और सारे सीइओ की तरपफ देखते हुए द्रौपदी ने अपनी बात जारी रखी। 'सच पूछिए तो मेरा स्वयंवर इतिहास बना देगा। मेरे स्यवंवर की वजह से ही आगे चल कर एक बहुत बड़ा यु( होगा। ऐसा यु(, जिसे महाभारत कहा जाएगा। इस यु( पर आगे चलकर कई टीवी सीरियल बनेंगे और पिफल्में बनेंगी। सोचिए सदियों तक आपके पफटेज का इस्तेमाल होगा। सोचिए आपकी कई पीढ़ियाँ मालामाल रहेंगी। अब बोलिए।'
सारे सीईओ के मुँह से एक ही सवाल एक साथ निकला- प्रसारण के अधिकार के लिए अप्लीकेशन पफॉर्म कहाँ से मिलेगा?
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;साहित्य, रंगमंच और पिफल्मों पर नियमित लेखन। कहानी और व्यंग्य लेखन भी। पिछले २५ सालों से हिन्दी पत्राकारिता। आजकल स्टार न्यूज से संब(।द्ध
ई-१०२, जनसत्ता अपार्टमेंट, सेक्टर-९, वसुंध्रा, गाजियाबाद, उ.प्र.
मो. ०९८७३१९६३४३

 
 
 
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