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नये इंसान की दुनिया में पैदाइश बची है
निराशा में भी मन में एक यह ख़्वाहिश बची है
बुराई हो भले ही हर जगह, हर वक़्त हावी
अभी अच्छाई की थोड़ी-सी गुंजाइश बची है
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अभी उम्मीद का जलता दिया बुझने न देना
अभी नन्हे दिये की आख़िरी कोशिश बची है
मिटा पाएँगे कैसे, दोस्त, हमको हादसे ये
अभी जीने की हममें थोड़ी-सी ख़्वाहिश बची है
अभी पूरी तरह टूटा नहीं हूँ मैं ग़मों से
अभी तो सब्र की ख़ामोश पैमाइश बची है
सुना है वक़्त ने सपने कुचल डाले थे उसके
मगर यह क्या कि सपनों में अभी जुंबिश बची है
तेरी खातिर मिटाया खुद को मैंने जिंदगी भर
बता ऐ शहर, अब क्या और पफ़रमाइश बची है
८िांदगी के सिलसिलों से ऊबने से पेशतर
मैं भी तैरा था नदी में डूबने से पेशतर
लहर से लड़ते हुए होगा भंवर से सामना
मैंने ये सोचा नहीं था जूझने से पेशतर
यों अचानक ही नहीं टूटा था मैं हालात से
कशमकश चलती रही थी टूटने से पेशतर
एक झोंके ने हरेपन का दिया ऐसा नशा
शाख़ लहराई हवा में सूखने से पेशतर
मेरी ग़ैरत को नहीं मं८ाूर था ऐसा सवाल
तूने कुछ तो सोचा होता पूछने से पेशतर
उसकी ख़ामोशी को मैंने ही नहीं समझा कभी
उसने तो मौक़ा दिया था रूठने से पेशतर
मुझको अपने ही जुड़ावों का खयाल आता रहा
मैं बहुत तड़पा था सब कुछ छूटने से पेशतर
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