जनवरी २०१०
 
 
 
   
 
 
 
•अमरकांत को इलाहाबाद में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित• जितेन्द्र श्रीवास्तव को देवीशंकर अवस्थी सम्मान•दिल्ली में विश्व (पुस्तक मेला ;राजकमल प्रकाशन के स्थापना दिवस पर तीन लखटिया पुरस्कारों की द्घोषणामहुआ माजी के उपन्यास 'मरंग गोड़ नीलकंठ हुआ' को तीसरा राजकमल कृति सम्मानविश्वनाथ त्रिापाठी की पुस्तक 'व्योमकेश दरवेश' को पहला सृजनात्मक गद्य सम्मान अमरेन्दु किशोर की कृति 'बादलों के रंग हवाओं के संग' को चौथा कृति सम्मानस्तंभ लेखक भारत भारद्वाज के खिलापफ वारंटद्ध)
 
 
 
गीत/ग़ज़ल
यश मालवीय
चला गया वो साल...


एक याद सिरहाने रखकर
एक याद पैताने रखकर
चला गया वो साल, साल वो चला गया
ख़ाली से पैमाने रखकर
भरे-भरे अपफ़साने रखकर
चला गया वो साल, साल वो चला गया

 

 

लम्बी छोटी हिचकी रखकर
थोड़े आँसू सिसकी रखकर
टूटे सपनों के बारे में
बातें इसकी उसकी रखकर

चिड़ियों वाले दाने रखकर
गुड़ द्घी ताल मखाने रखकर
चला गया वो साल, साल वो चला गया

उजियारे, कुछ स्याही रखकर
कल की नयी गवाही रखकर
लाल गुलाबी हरे बैगनी
रंग कत्थई काही रखकर

भूले बिसरे गाने रखकर
गानों में कुछ माने रखकर
चला गया वो साल, साल वो चला गया

नीली आँखों, चिठ्ठी रखकर
इमली कुछ खटमिठ्ठी रखकर
शुभ संकेतों वाली मुँह में
बस थोड़ी सी मिट्टी रखकर

सच के सोलह आने रखकर
बच्चों के दस्ताने रखकर
चला गया वो साल, साल वो चला गया


 
 
 
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पिछे जाये...
 
 
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