कितना कहता हूँ पर नहीं जाता
द्घर से डर के वो द्घर नहीं जाता
रो८ा अहसां जता ही देता है
ये न करता तो मर नहीं जाता
जोड़ने वाले तोड़ते न अगर
तो मैं ऐसे बिखर नहीं जाता
उसने वर्दी के रंग देखे हैं
उसके ८ोहन से डर नहीं जाता
प्यार के नाम पे दिखावा था
ये नशा यूँ उतर नहीं जाता
अअअ
जबसे हुई सियानी बिटिया
भूली राजा-रानी बिटिया
बा८ाारों से आते-जाते
होती पानी-पानी बिटिया
जाना तुझे पराए द्घर को
मत कर यूँ मनमानी बिटिया
किस द्घर को अपना द्घर समझे
जीवन-भर कब जानी बिटिया
चॉकलेट भैया को भाए
पाती है गुड़धानी बिटिया
सारा जीवन इच्छाओं की
देती है कुर्बानी बिटिया
चौका, चूल्हा, झाडू, बर्तन
भूल गई शैतानी बिटिया
हल्दी, बिछुए, कंगन, मेंहदी
पाकर हुई बिरानी बिटिया |