अक्टूबर 2009
 
 
 
   
 
 
 
• काशीनाथ सिंह का साहित्य अकादमी • अदम गोंडवी और भारत भूषण का निधन • जयपुर में लिटरेचर पफेस्टिवल में सलमान रुशदी •हिन्दी के कवि कुबेर दत्त और नुक्कड़ नाटक के पितामाह गुरुशरण सिंह का निधनर सम्मान।
 
 
 
ख़बरनामा
चिंतन के आँसू : रवीन्द्र त्रिापाठी
तीन सितंबर दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय सभागार में एक समारोह में असमिया साहित्यकार लक्ष्मीनंदन बोरा को 'सरस्वती सम्मान' और कथाकार मन्नू भंडारी को 'व्यास सम्मान' के.के. बिड़ला फाउंडेशन ने २००८

के लिए दिया। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने ये पुरस्कार प्रदान किए। लक्ष्मीनंदन बोरा को 'सरस्वती सम्मान' के रूप में पाँच लाख रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्रा एवं प्रतीक चिन्ह दिया गया। यह सम्मान प्राप्त करने वाले वह पहले असमिया साहित्यकार है। उन्हें यह सम्मान उनके २००२ में प्रकाशित उपन्यास 'कायाकल्प' के लिए दिया गया। बोरा ने अब तक ५६ पुस्तकें लिखी है जिसमें उपन्यास, कहानी संग्रह, एकांकी, यात्राा वृत्तांत एवं जीवनी शामिल है। उन्हें १९८८ में उनकी कृति 'पातालभैरवी' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है।

मन्नू भंडारी को उनकी २००७ में प्रकाशित आत्मकथा 'एक कहानी यह भी' के लिए २००८ का 'व्यास सम्मान' दिया गया। इस सम्मान के रूप में उन्हें ढाई लाख रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्रा और प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। १९३१ में मध्य प्रदेश के ज्ञानपुरा में जन्मी मन्नू भंडारी के अब तक चार उपन्यास, १२ कहानी संग्रह एवं दो नाटक प्रकाशित हो चुके है। नए कहानीकारों में मन्नू भंडारी को उनके यथार्थ बोध, जीवन बोध तथा रचनात्मक विशिष्टता के लिए रेखांकित किया जा सकता है। किसी रचनाकार को उनकी आत्मकथा के रूप में 'व्यास सम्मान' पहली बार दिया गया है।

मन्नू भंडारी ने अपनी इस आत्मकथा के विषय में बताया कि बीमारी की वजह से उन्होंने इस आत्मकथा को टुकड़ों-टुकड़ों में लिखा है। अगर यह एक बैठक में लिखी गयी होती तो बेहतर किताब होती। इस अवसर पर के.के. बिड़ला फाउंडेशन की अध्यक्षा शोभना भरतिया ने कहा कि के के बिरला की अनुपस्थिति में यह सम्मान पहली बार दिया गया है। उनके कामों की जिम्मेवारी अब मेरे कंधें पर है। कार्यक्रम के अंत में प्रियव्रत भरतिया ने आभार जताया।

 
 
साहित्यकार मृदुला गर्ग पुरस्कृत
 
साहित्य, संस्कृति तथा कलाओं के प्रोत्साहन के लिए समर्पित 'स्पंदन संस्था, भोपाल' द्वारा 'स्पंदन कथा शिखर सम्मान वर्ष २००९' के लिए हिन्दी की प्रतिष्ठित कथाकार मृदुला गर्ग को चुना गया है। पुरस्कार के अंतगर्त ३१ हजार रुपये की राशि, शॉल, श्रीफल तथा स्मृति चिन्ह दिया जाएगा। यह चयन सर्वसम्मति से वरिष्ठ निर्णायक मंडल द्वारा किया गया है। इस निर्णायक मंडल के सदस्य थे- प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, गोविंद मिश्र, डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिाय, चित्राा मुद्गल तथा प्रो. कमला प्रसाद।
 
नंद भारद्वाज को बिहारी पुरस्कार
 
साहित्यकार एवं मीडियाकर्मी नंद भारद्वाज को वर्ष २००८ के प्रतिष्ठित 'बिहारी पुरस्कार' दिया गया। जयपुर में २४ अगस्त को उन्हें उनकी काव्य रचना 'हरी दूब का सपना' के लिए प्रदान किया गया। मुख्यमंत्राी अशोक गहलोत ने पुरस्कार के रूप में उन्हें प्रशस्ति पत्रा, स्मृति चिन्ह एवं एक लाख की राशि प्रदान की। इस अवसर पर मुख्यमंत्राी ने लेखकों और साहित्यकारों के लिए बनाए गये कल्याण कोश का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सरकार हमेशा उनके लिए समर्पित भाव से कार्य करती रहेगी। नंद भारद्वाज ने इस अवसर पर कहा कि 'कविता को मैं अपने चित्त के अध्कि करीब पाता रहा हूँ। ...प्रत्येक समाज अपने ऐतिहासिक विकास क्रम में जो साहित्य रचता है, उसी के माध्यम से वह अपने समय की सर्जनात्मक चेतना का निर्माण करता है।'
 
मनोज कुमार को भारत भूषण
 
हिन्दी के युवा कवि मनोज कुमार झा को इस वर्ष का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें 'स्थगन' कविता के लिए दिया गया। जो पिछले वर्ष 'कथन' पत्रिाका में प्रकाशित हुई थी। इस वर्ष के निर्णायक प्रसि( कवि और 'आलोचना' के संपादक अरुण कमल थे। अरुण कमल इसी वर्ष नेमिचंद जैन के निधन के बाद भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार के जूरी सदस्य बने थे।
 
शतरंज के खिलाड़ी का पाठ
 
प्रेमचंद जयंती पर माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग और जनसंस्कृति के संयुक्त तत्वाधन में प्रसि( निर्देशक सत्यजित राय की पिफल्म 'शतरंज के खिलाड़ी' का जन प्रदर्शन किया गया। यह पिफल्म प्रेमचंद की प्रसि( कहानी 'शतरंज के खिलाड़ी' पर आधरित है। प्रेमचंद की इस कहानी में नवाब वाजिदशाह के समय के लखनउफ की समाजिक एवं राजनीतिक स्थिति को दर्शाया गया है। इस आयोजन में वरिष्ठ कवि प्रो. नंद चतुर्वेदी ने कहा कि नये समय के दवाबों का सामना करने के लिए साहित्य को भी नये-नये रूप धरण करने होंगे। इसके अतिरिक्त प्रो. नवल किशोर, रंगकर्मी महेश नायक एवं प्रो. हेमेन्द्र चण्डालिया अपने विचार रखे। जसम के सदस्य शैलेन्द्र भाटी ने कहानी का पाठ किया। आयोजन में पिफल्म पर चर्चा में डॉ. सुध चौध्री, डॉ. सर्वतुन्निसा खां, डॉ. फरहत बानो, डॉ. रजनी कुलश्रेष्ठ आदि ने भाग लिया।
 
पत्राकारिता मरी तो मरेगा लोकतंत्रा
 
पत्राकार प्रभाष जोशी ने आकाशवाणी के समाचार संपादक संजय कुमार की पुस्तक 'बिहार की पत्राकारिता तब और अब' का लोकापर्ण पटना में आयोजित 'रामचरित्रा सिंह स्मृति व्याख्यान' के दौरान किया। प्रभाष जोशी ने कहा कि अगर पत्राकारिता मर जाएगी तो लोकतंत्रा मर जाएगा। पत्राकारिता साधारण नागरिक का हथियार है। इसके माध्यम से वह विधायिका पर नजर रखता है। इस पुस्तक में संजय कुमार ने बिहार की पत्राकारिता की विभिन्न और विविध् पत्राकारीय गुणों की तफसील से चर्चा की है। इस अवसर पर साहित्यकार खगेन्द्र ठाकुर, पत्राकार हरिवंश, हेमन्त, स्वयं प्रकाश आदि उपस्थित थे।
 
'पलाश वन दहकते हैं' का लोकार्पण
 
अलवर ;राजस्थानद्ध की साहित्यिक संस्था 'नया आयाम' की ओर से स्व. लेखिका मंजु अरूण की प्रतिनिध्ि रचनाओं का संग्रह 'पलाश वन दहकते हैं' का लोकार्पण हुआ। पुस्तक के संपादक विनय मिश्र ने कहा कि मंजु अरूण का साहित्य इस अर्थ में कालजयी है क्योंकि इसमें अपने समय और समाज की प्रतिध्वनि मौजूद है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. जीवन सिंह ने बताया कि उनकी रचनाओं में स्त्राी जीवन के अलावा किसान, मजदूर, खेत, पर्यावरण आदि विषयों पर लिखकर अपने बहुआयामी रचना बोध् को प्रकट किया है। कार्यक्रम तीन सत्राों में संपन्न हुआ।
 
बहु केंद्रियता की ओर लौटना
 
'महानगरों में रहने वाले ज्ञात और प्रसि( आलोचकों की जगह छोटे कस्बों के योग्य आलोचकों को प्रमोद वर्मा 'आलोचना सम्मान' दिया जाना बौ(कि रूप से बहुकेंद्रीयता की ओर लौटने की प्रवृत्ति है जो साहित्य का शुभ संकेत है।' युक्त विचार हिन्दी के आलोचक एवं कवि अशोक वाजपेयी ने १०-११ जुलाई ०९ को रायपुर में आयोजित दो दिवसीय आलोचना संगोष्ठी एवं प्रथम प्रमोद वर्मा आलोचना समारोह के दौरान व्यक्त किए। इस समारोह में प्रथम प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान भागलपुर के आलोचक भगवान सिंह तथा वाराणसी के कृष्ण मोहन को दिया गया। सम्मान के रूप में उन्हें क्रमशः २१ हजार एवं ११ हजार रुपये देने के साथ ही प्रमोद वर्मा समग्र, प्रशस्ति पत्रा आदि देकर अलंकृत किया गया।
 
गिरधर राठी का कविता पाठ
 

'मेरे लिए कविता दुनिया को जानने और समझने का माध्यम है...और इसके द्वारा जो कुछ भी जाना और समझा जाता है उसकी अपनी वैध्ता है, सच्चाई है, हकीकत है, उसे जानने या समझने के किसी दूसरे तरीके से खण्डित नहीं किया जा सकता।' उक्त विचार वरिष्ठ कवि गिरध्र राठी ने हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा आयोजित 'इस समय' कार्यक्रम में दिए अपने वक्तव्य में कहे। अपने काव्य पाठ के दौरान उन्होंने दो दर्जन से ज्यादा कविताएँ सुनाई जिनमें प्रमुख रूप से आमरण, कौन जो बतलाए सच, ठहराव, पुनश्च, एक तरफा आदि थी। आपातकाल के दौरान तिहाड़ जेल में रहते हुए लिखी उनकी कविता 'आवाजों का पहाड़' और हाल ही में आए उनके नए काव्य संग्रह 'अंत के संशय' में शामिल कविता 'दिल्लीनामा' को दर्शकों ने खूब सराहा।

हिन्दी अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. अशोक चक्रध्र ने कहा कि गिरधर राठी की कविता में 'गूँज-अनुगूँज' वाला तत्व दिखता है जो अपने समय के सच को सच्चाई से व्यक्त करता है। अकादमी के सचिव डॉ. रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि 'इस समय' श्रृंखला द्वारा हम इस दौर के महत्वपूर्ण लेखकों के जरिए वर्तमान समय की प्रतिध्वनि, आगामी समय की आहट और पीछे छूट चुकीं अनुगूँजों को सजोने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भास्कर प्रकाशन समूह के समूह संपादक श्रवण कुमार गर्ग ने की। कार्यक्रम में अजित कुमार, वेदप्रताप वैदिक, देवेन्द्र राज अंकुर, सुरेन्द्र मोहन, रमणिका गुप्ता आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

 
हिन्दी अकादमी का 'कवित्रायी'
 

'गए सालों में कवि सम्मेलनों का जो स्तर गिरा है, उसके चलते वे नौटंकी मात्रा बनकर रह गए हैं, पहले जैसी संस्कृति और संस्कार अब मंच पर नहीं दिखते, लेकिन हिन्दी अकादमी द्वारा आयोजित इस 'कवित्रायी' में कवियों की गम्भीर कविताओं और उसे दर्शकों द्वारा सराहने से मेरा हौसला पिफर बँध है।' उक्त विचार देश के वरिष्ठ कवि और शायर बेकल उत्साही ने त्रिावेणी सभागार में 'कवित्रायी' श्रृंखला के पहले कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रकट किए। इस 'कवित्रायी' में राज नारायण बिसारिया, बाल स्वरूप राही, और विनय विश्वास ने काव्य-पाठ किया। कार्यक्रम के आरंभ में हिन्दी अकादमी के सचिव डॉ. रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव 'परिचय दास' ने कार्यक्रम के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि हम इस 'त्रायी' द्वारा उन महत्वपूर्ण कवियों को सामने लाना चाहते है जो हमारे समय और समाज को सजगता के साथ अपनी कविता में प्रतिबिंबित कर रहे हैं। अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. अशोक चक्रध्र ने कहा कि इस आयोजन से यह अंदाजा न लगाया जाए कि हम केवल वरिष्ठ कवियों को ही मंच प्रदान करेंगे, बल्कि समय-समय पर इस 'त्रायी' के क्रम बदलते रहेंगे, कभी केवल युवा, या कभी युवा-वरिष्ठ या पिफर कभी कवि और कवयित्रिायों का मेल भी देखने को मिलेगा।

सबसे पहले युवा कवि आलोचक और निबंध्कार विनय विश्वास ने अपनी नई और गम्भीर कविताओं में से 'तरक्की', 'मैं', 'कुत्ता', 'कलाकार', 'मेहनत', 'भविष्य', 'स्त्रिायां बोली' कविताएँ प्रस्तुत की। प्रेम कविता की पंक्तियाँ, 'वह बारिश जिसने होने के लिए सूखे को चुना' और 'जहाँ सवेरा देर तक ठहरे, टी वी के ऊपर किताबें रहे, जहाँ हर कमरा अपने को द्घर बताने पर न अड़ा हों' को श्रोताओं की भरपूर तालियां मिली। वरिष्ठ कवि बाल स्वरूप राही जो अपने गीतों में आधुनिक भाव-बोध् और समकालीन प्रश्नों को सहजता से उठाने के लिए जाने जाते हैं, ने ग़८ाल-हम पर दुख का पर्वत टूटा, तब हमने दो चार कहे/उस पर भला क्या बीती होगी जिसने शेर हजार कहे-से अपना कविता पाठ शुरू किया। राज नारायण बिसारिया ने दो-तीन छोटी कविताओं से शुरूआत कर राजनीति में आए अवसरवाद पर कई गंभीर टिप्पणियाँ की। जैसे-राजपथों ने पगडंडी को जितनी-जितनी बार छुआ-एक और खाई दे डाली और दूसरी ओर कुआँ। कार्यक्रम के आरंभ में बेकल उत्साही के कविता संग्रह 'ध्रती सदा सुहागन' का विमोचन बालस्वरूप राही, राजनारायण बिसारिया, प्रो. अशोक चक्रध्र और डॉ. रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव 'परिचय दास' के सान्निध्य में हुआ।

 
'वह सपने बेचता था' का लोकार्पण
 
युवा कथाकार और समीक्षक राकेश बिहारी के प्रथम कहानी संग्रह 'वह सपने बेचता था' का लोकार्पण राजेन्द्र भवन, दिल्ली में 'हंस' के संपादक राजेन्द्र यादव ने किया। लोकार्पण के बाद इस पुस्तक में संकलित कहानियाँ पर विचार-विमर्श भी हुआ। जिसमें संजीव, डॉ. रोहणी अग्रवाल एवं रवीन्द्र त्रिापाठी ने हिस्सा लिया। राजेन्द्र यादव ने कहा कि राकेश की कहानियाँ समय के सच के साथ मुठभेड़ करते हुए एक संभावना जगाती है। कार्यक्रम में पंकज बिष्ट, मदन कश्यप, लता शर्मा, अपूर्व जोशी आदि उपस्थित थे। जिसका संचालन विभास वर्मा ने किया।
 
पर्यटन एवं साहित्य सम्मान-०९
 
हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा अपने ३७वें स्थापना दिवस के अवसर पर एस आर हरनोट को पर्यटन एवं साहित्य के क्षेत्रा में उनकी उपलब्ध्यिों एवं योगदान के लिए पर्यटन सम्मान २००९ से सम्मानित किया गया है। उन्होंने पर्यटन, सांस्कृतिक और साहित्यिक पत्राकारिता से लेखन में प्रवेश किया। अब तक उनकी एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है जिसमें हिमाचल के विविध् विषयों पर चार पुस्तकों सहित पांच कहानी संग्रह और एक उपन्यास भी है। उनकी एक कहानी 'दारोश' पर दिल्ली दूरदर्शन द्वारा लद्घु पिफल्म का निर्माण किया गया है। अन्य सम्मानों में अंतराष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान, राज्य अकादमी सम्मान, अखिल भारतीय भारतेन्दु हरिश्चंद्र एवार्ड एवं हाल ही में शब्द साध्क जनप्रिय लेखक सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
 
मनीषा कुलश्रेष्ठ सम्मानित
 
प्रयास संस्थान, चुरू द्वारा राजस्थान के हिन्दी साहित्य को सम्मानित एवं प्रोत्साहित करने के लिए दिए जाने वाले 'डॉ. द्घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार' इस बार जोध्पुर की मनीषा कुलश्रेष्ठ को दिया जाएगा। प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने बताया कि मनीषा कुलश्रेष्ठ का इस पुरस्कार हेतु भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित उनकी कहानी संग्रह 'कठपुतलियां' के लिए दिया जाएगा। 'कठपुतलियां' के अतिरिक्त उनकी अन्य रचनाओं में 'बौनी होती परछाई', 'कुछ भी तो रूमानी नहीं' कहानी संग्रह प्रकाशित है। वे हिन्दी की पहली वेब पत्रिाका हिन्दीनेस्ट डॉट कॉम का संपादन कर रही हैं। इस पुरस्कार से पूर्व कुलश्रेष्ठ को राजस्थान साहित्य अकादमी का चंद्रदेव शर्मा पुरस्कार व कथाक्रम का भारतीय युवा कहानीकार पुरस्कार मिल चुका है।
 
कुँवर नारायण को 'नई धारा' सम्मान
 
हिन्दी के प्रसि( कवि कुँवर नारायण को 'नई धरा' साहित्यिक पत्रिाका द्वारा वर्ष २००९ का तृतीय 'उदयराज सिंह स्मृति सम्मान' देने की द्घोषणा की गई है, जिसके तहत उन्हें एक लाख रुपए सहित सम्मान पत्रा, स्मृति चिन्ह दिए जाएँगे। इसके साथ ही चर्चित कथाकार नासिरा शर्मा, बालेंदु शेखर तिवारी तथा राध्ेश्याम तिवारी 'नई धरा रचना सम्मान ०९' से सम्मानित होगें। सम्मान स्वरूप उन्हें २५-२५ हजार रुपये व सम्मान पत्रा, प्रतीक चिन्ह दिए जाएँगे। इन पुरस्कारों की द्घोषणा 'नई धरा' के प्रधान संपादक प्रमथराज सिंह ने की। साहित्यकार हिमांशु जोशी की अध्यक्षता में इन रचनाकारों का चयन किया गया था। सभी रचनाकारों को आगामी ५ नवंबर को पटना में आयोजित एक समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
 
शोषण के विरु( कविता
 

बीएचयू स्थित भारत कला भवन के सभागार में २० अगस्त को युवा संवाद मासिक पत्रिाका के कविता केंद्रित अंक 'शोषण के विरु( कविता' का लोकार्पण किया गया। यह अंक युवा कवि अरूणाभ सौरभ द्वारा संपादित किया गया। इस अवसर पर कवि ज्ञानेंद्रपति ने कहा कि कविता की एक धरा है, एक परंपरा है, एक प्रवाह है और उसी में समकालीन कवि अपनी जगह बनाता हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. चन्द्रकला त्रिापाठी ने की। दो सत्राों में विभाजित इस कार्यक्रम के दूसरे सत्रा में त्रिालाचन स्मृति कवि गोष्ठी हुयी। इसमें ज्ञानेंद्रपति, प्रो. वशिष्ठ अनूप, आशीष त्रिापाठी, अलिन्द उपाध्याय, व्योमेश शुक्ल, गिरिराज किराडु आदि ने कविताओं का पाठ किया।

प्रस्तुति : प्रतिभा कुशवाहा

 
 
विस्तृत नभ में 'पाखी' का पहला पड़ाव
 
तेईस अगस्त का दिन। राजधानी दिल्ली का हिन्दी भवन। 'पाखी' महोत्सव का आयोजन। द्वितीय 'शब्द साधक शिखर सम्मान' से श्रीलाल शुक्ल नवाजे गये। उनके अलावा पाँच और रचनाकार भी सम्मानित हुए। संजीव पर केंद्रित 'पाखी' के अंक का लोकार्पण हुआ। महोत्सव के दूसरे सत्रा में 'साहित्य और पत्राकारिता में गाँव' विषय पर संगोष्ठी में विद्वानों ने विचारोत्तेजक बातें रखीं। और अंत में महोत्सव के तीसरे चरण के रूप में मशहूर ग़८ाल गायक हुसैन बंधुओं ने संगीत का दिलकश समां बांधा। पेश है पूरे आयोजन की विस्तृत रिपोर्ट :
 
 
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