| रहमदिली का सच : आशा तनेजा |
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कार में बैठते ही एक्सपोर्ट कंपनी के मालिक ने अपनी एकाउंटेट को फोन लगाया-'अनाथालय वाले चेक के साथ एक ओर चेक दो लाख रुपये का बना दो। भगतसिंह पुल के पास की गरीब बस्ती के अस्पताल के नाम पर। अब हर महीने इतनी ही राशि हम भिजवाया करेंगे और याद रहे इस मामले मे कोई कोताही न हो।
एकाउंटेंट की तरफ से आवाज आई सर आज मैं ऑपिफस नहीं आ पाऊँगी, मैं कल रात से हॉस्पिटल में हूँ मेरे बच्चे की तबीयत बहुत खराब है। आपके बच्चे की तबीयत का दफ्रतर के काम से कोई वास्ता नहीं है। तुरंत ऑपिफस पहुुँच कर चेक तैयार कीजिए, मैं ऑपिफस के लिए द्घर से निकल चुका हूँ।
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