सितंबर २०१२
 
 
 
   
 
 
 
• मनीषा कुलश्रेष्ठ को 'लमही सम्मान' • निदा फाजली को पद्मश्री सम्मान •देवेंद्र इस्सर नहीं रहे• ओड़िया लेखिका प्रतिभा रॉय को २०११ का ज्ञानपीठ पुरस्कार•चंद्रकांत देवताले को साहित्य अकादमी पुरस्कार • कुणाल सिंह को युवा साहित्य अकादमी सम्मान • तीसरा 'कृष्ण प्रताप कथा सम्मान' (२०१२) गीतांजलिश्री की कृति 'यहां हाथी रहते थे' को • रविशंकर को मरणोपरांत लाइफटाइम अचीवमेंट ग्रैमी पुरस्कार • विनोद कुमार शुक्ल को हिन्दी काव्य साहित्य में रचनात्मक योगदान के लिए 'परिवार' पुरस्कार • वरिष्ठ साहित्यकार कामतानाथ नहीं रहे
 
 
 
 
 
संपादकीय/प्रेम भारद्वाज
आपका पन्ना
कविता में ज्ञानरंजन
संवाद
मूल्यांकन
व्यक्तित्व/संवाद
व्यक्तित्व
यारबाशी के दिन
ज्ञानरंजन के पत्र
पत्र/ज्ञानरंजन के नाम
पत्र के बहाने
पहल का दखल
पहल के विशेषांक
पुस्तक के बहाने
कटद्घरे में
कटद्घरे में/संवाद
युवा कथाकारों की राय में ज्ञानरंजन
बकलम खुद
कहानी
संस्मरण
सृजन संदर्भ
मेरी बात/अपूर्व जोशी
तस्वीरों में ज्ञानरंजन
   
 
पाखी महोत्सव ...
पाखी परिचय
हिन्दी साहित्य की पत्रिकाओं की भीड़ में अलग पहचान बनाने वाली 'पाखी' का प्रकाशन सितंबर, २००८ से नियमित जारी है। प्रवेशांक का लोकार्पण हिन्दी के वरिष्ठ आलोचक नामवर सिंह ने किया। उस अवसर पर नामवर सिंह ने उम्मीद जताई थी कि 'पाखी' अपनी ही उड़ान भरेगी और यही हो रहा है।
 
 
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