मंजुश्री

महीन-सी हद

तिलिस्मी माहौल बातों से भी रचा जा सकता है।
रीमा रच रही थी। बातों के गोल-गोल लच्छे।उनमें अटका हुआ एक अप्रत्याशित, अनजाना और कुछ नया रोमांच। तय जैसा कुछ नहीं, फिर भी कुछ तो है।
“बस , कुछ देर और!  इंतज़ार।“ रीमा धीरे से मुस्करायी। रहस्य- रंगी  मुस्कराहट।
सुनने वाले भकुए से देख -सुन रहे थे उसे। उसकी आँखों की चमक में शरारत और संजीदगी एक साथ टिमटिमाती हुई। चेहरे के भा....

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