महेश कुमार केशरी

पच्छिम दिशा का लंबा इंतजार.. 

मंझली काकी और सब 

कामों के  तरह ही करतीं

हैं, नहाने का काम और 

बैठ जातीं हैं, शीशे के सामने

चीरने अपनी माँग.. 

 

और अपनी माँग को भर 

लेतीं हैं, भखरा सेंदुर से, ..

भक..भक...

और

फ....

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