मीनाक्षी सिंह

उलझनों का मकड़जाल

आज सालों बाद गाँव जाना हुआ

बाल सखी नलिनी से मुलाकात हुई

आई थी वो अपनी माँ की अंतिम क्रिया में

जार-जार रोते हुए मेरे गले लग गयी

कहा उसने मायका तो माँ तक ही

रह जाता है प्रिया, 

भाई तो पटीदार से होते हैं

माँ सा स्नेह फिर कौन किसे देता ....

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