दामोदर दत्त दीक्षित

ब्रेनवाश

सूर्यदेवता अभी प्रकट नहीं हुए थे, पर किसी भी समय प्रकट हो सकते थे। वह नहर से खेत में पानी लगाकर मेड़-मेड़ लौट रहा था। कन्धे पर फावड़ा था। तभी सेल फोन की घण्टी बजी। वीरेश कुमार का दरभंगा से फोन था। न ‘गुड मार्निंग’, न ‘नमस्ते’, सीधे ठोंक दिया, ‘‘कंग्रेट्स यार! तूने तो अट्ठा मार दिया! अड़सठवीं रैंक आई है। कमाल कर दिया रे! यह तो जानता था कि तू जे0ई0ई0 क्रैक करेगा, पहले अटेम्प्ट ....

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