वासुदेव

विश्वासघात

 

पूर्व पीठिका: लेखक बनाम कथाकार कुछ लिखता तब है जब कोई थीम अथवा घटना रूपी कीड़ा उसके दिलो-दिमाग का कुतरने लगता है। वह थीम अथवा घटना कथाकार के दिमाग में तीन तरह से आती है। पहली किसी मर्मस्पर्शी घटना, चरित्र अथवा परिवेश से रू-ब-रू होने पर दूसरी उसके अध्ययन अनुशीलन से और तीसरी उसके बारे में किसी से सुनने अथवा वैसी परिस्थिति को भोगने या उसमें जीने से। कभी-कभी थ....

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