अरूणेन्द्र नाथ वर्मा

हाफ टिकट वाला न्यायतंत्र 

ऐसी भी कुछ रातें होती थीं जब दो- तीन बजे तक बिस्तर पर पड़े पड़े करवटें बदलते रह जाते थे जज साहेब. जब उससे थक जाते तो बिस्तर छोड़कर उठ बैठते. बीस वर्षों से हर खुशी, हर गम में साथ देने वाली पत्नी सुप्रिया आजिज़ आ चुकी थीं उनकी इस आदत से. खैरियत इतनी थी कि ऐसा कई महीनों में एक-आध बार ही होता.जिला सेशंस कोर्ट के न्यायाधीश की हैसियत से चोरी, डकैती और खेत खलिहान में दो गुटों के बीच खून खराब....

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