राम करन

उदास प्यादे/ राजा के आलोचक

शतरंज के राजा बीच में थे। उनके दोनाें तरफ सभी सामन्त और ओहदेदार थे। हाथी सीधा और ऊंट तिरछा चलता था। घोड़े की चाल किसी को जल्दी समझ नहीं आती थी।  मंत्री तो हरफनमौला था। जिधर दुश्मन दिखाई पड़ते, चल पड़ता। जहां पहुंचता तबाही मचा देता। लेकिन इन सबकी सुरक्षा के लिए एक अग्रिम पंक्ति थी- प्यादों की। जब तक प्यादे थे, किसी की जान को खतरा न था। बल्कि होता यह कि जब भी किसी क्षत्रप पर ....

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