झौली पासवान

लक्ष्मण रेखा

सहम गई दुनिया सारी
मय कातक मनुज
समाज आज।
महल झोपड़ी और अटारी
शोकाकुल नर, नारी आज
भोंपू नदारद सड़क पर
खाली पड़ा चौपाल आज
अदृश्य है वह महासबल
वह महासबल विकराल
मुल्क का शमन करने चला आज
लगने लगे अपने बेगाने
सब बन्द किये निज द्वार आज
लटक रहे ताले दफ्तरों में
गांवों शहरों में सन्नाटा
भूले शैलानी सैर सपाटा
अपने घरां में दुबके आज।
बह च....

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