सुशांत सुप्रिय

इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं

देह में फाँस-सा यह समय है
जब अपनी परछाईं भी संदिग्ध है
'हमें बचाओ, हम त्रस्त हैं'--
घबराए हुए लोग चिल्ला रहे हैं
किंतु दूसरी ओर केवल एक
रेकाॅर्डेड आवाज़ उपलब्ध है--
'इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं'

न कोई खिड़की, न दरवाज़ा, न रोशनदान है
काल-कोठरी-सा भयावह वर्तमान है
'हमें बचाओ, हम त्रस्त हैं'--
डरे हुए लोग छटपटा रहे हैं
किंत....

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