रीटा मक्कड़

मां

लोग कहते हैं मैं दिखती हूं मां जैसी
पर मुझे लगता है मां तू मुझमें
ही आत्मसात होती जा रही है।
तेरे शरीर का ही तो एक हिस्सा हूं मां
तेरे ही रूप में ढलती जा  रही हूं मैं
उस मोमबती के मोम की तरह
जो तिल तिल कर जलती है
फिर भी आखिर तक रोशनी बांटती है

वो तेरी आँखो की चमक
तेरे होठों की मुस्कान कहां गायब हो गयी
तेरी उदासी तेरा अकेलापन
मुझसे देखा नही....

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