अर्चना त्यागी

कैसे गाएं गीत मल्हार

रोक लगी लेने पर सांस
दिखती नहीं है कोई आस।
बढ़ता जाता दुख का आकार
कैसे गाएं गीत मल्हार।
कैसा दुनिया का हुआ ढंग
फीके पड़े जीवन के रंग।
किसकी करें अब मनुहार
कैसे गाएं गीत मल्हार।
जो बीत रहा वो समय नहीं
जिन्दगी लगती थोपी हुई।
हर तरफ उठ रही है चीत्कार
कैसे गाएं गीत मल्हार।
सावन सूना झूले बिना
गुझियां बिना, मेले बिना।
बिसर गए हैं सब त्यौह....

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