-अनुवाद: पापोरी गोस्वामी

रम्यभूमि  

आजकल राधा को सुबह-सुबह स्कूल जाना पड़ता है, उधर शाम तक वहीं रुकना पड़ता है. लंच में घर आकर वो खाना खाती है. आज सुबह के बाद से तारा ने उसे देखा ही नहीं था. शाम को जब योगमाया उसे चाय-नाश्ता खिला रही थी, उस वक्त तारा रसोई के दरवाज़े पर जाकर खड़ी हो गई. राधा सर झुकाती हुई धीरे-धीरे खा रही थी, योगमाया उसके पास बैठी थी. तारा के दरवाज़े पर खड़े होते ही राधा ने सर उठाकर देखा और मुस्कुराकर कहा, “ आ....

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