अरविन्द यादव

काव्य संग्रह 'रथ के धूल भरे पांव' की समीक्षा

कविता जीवनानुभवों की रागात्मक अभिव्यक्ति है। संवेदनाओं की लहरें जब अप्रतिहत कवि के मानस सागर को उद्वेलित करती हैं तो अनायास ही कविता की स्रोतस्विनी प्रस्फुटित हो उठती है और वह अजस्र जलधार जब सभ्यता और संस्कार के पुलिनों से  आबद्ध हो कल कल निनाद करती शुष्क हृदय रूपी जमीन को अभिसिंचित करती है तो बंजर जमीन में भी कुसंस्कारों की कंटीली झाड़ियों की जगह संस्कारों और जीवन....

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