राजनारायण बोहरे

सांझ का सूरज

दरवाजा चाची ने हीं खोला। राकेश को देखकर उनके चेहरे पर प्रसन्नता की हल्की सी किरण थिरकी और तुरंत ही लुप्त हो गई। वे फिर से संजीदा हो आयी थीं। नजर नीची कर एक ओर को हटते हुए उन्होंने राकेश को रास्ता दिया। राकेश ने सूटकेस एक तरफ रखा और झुक कर चाची के चरण छू लिए। जाने पैर के नाखूनों से आंखों का क्या सीधा संबंध है कि इधर चाची के पैरों से उसकी अंगुलियों का स्पर्श हुआ और उधर चाची की ....

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