अश्विनी रूद्र

लाल ईंट  

सुबह की पौ फटने वाली थी | क्षितिज पर लालिमा छा गयी थी | पेड़ों पर पंक्षियों का चहचहाना शुरू हो गया था | दलान पर अधिकांश पुरुष सोये ही हुए थे | उसी समय मनोहर दलान में दौड़ता चिल्लाता आया था, ‘सभी लोग  खेतों पर जल्दी चलिए | सुबह सुबह ही उनलोगों ने हमारे खेतों में लाल झंडा गाड़ दिए हैं |’
बीसवीं सदी के 90 के दशक में बिहार के भोजपुर जिले के दक्षिणी हिस्से, जिसे आम बोलचाल में ‘दक्ख....

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