प्रांजल राय

----- हमारा समय एक हादसा है ------

देवताओं के मुकुट सब गिर गए हैं
आधे टूटे पड़े हैं- धूल में नहाए हुए,
दुराग्रहों के प्रेत करते नंगा नाच चहुँ ओर
कि हमारे समय में अब हादसे नहीं होते,
हमारा समय ही एक हादसा है अब ।
धू-धू करती सभी दिशाएँ
चीख कान तक पहुँच न पाए
लिए गोद में शावक अपना
सद्य-प्रसूता हिरणी कातर
खोज रही है एक रास्ता,
एक रास्ता कि जो अब तक
नहीं बना है समिधा उस अग्नि में
जिसकी....

Subscribe Now

पूछताछ करें