यशवंत कुमार

तथागत

बांस की छाती पर 

सूई से टांके जाते हैं शब्द

 

पुरस्कार पाता है लेखक-कवि

अमर होती है कविता-कहानी

 

बांस का बलिदान

किताबों की खोह में डूब जाता है।

 

कटे बांस की फुनगी 

झुरा जाती है जेठ ....

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