कमल जीत चौधरी

आटे का झण्डा   

पिता का उगाया
गेहूँ 
धान
मक्का
बाजरा या कपास 
मेरा जीवन नहीं बदल सका

लाम से लिखा गया भाई का पत्र
मुझे शांति नहीं दे सका

विश्वविद्यालय का एक भी शोध
मेरे हृदय में इंद्रधनुष नहीं रच सका।
 
अफीम की प्रभात फेरियों को देखकर 
मेरा खून खौल उठा:

माँ से पेड़ा लेकर
आटे का झण्डा बनाते एक ब....

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