अवनीश त्रिपाठी

वर्गीय संरचना को समझने का प्रयास  

 शोभनाथ शुक्ल के सद्यः प्रकाशित उपन्यास 'अँगूठे पर वसीयत' को पढ़ते हुए ग्राम्य कथा का वर्तमान परिदृश्य सचित्र आँखों के सामने जीवंत हो उठा।प्रेमचंद जैसे उपन्यासकार 'उपन्यास' को मानवचरित्र की प्रतिच्छवि के रूप में देखते थे।यही उनका उद्देश्य भी रहा था।लेकिन इसका यह आशय नहीं है कि वे कथा की रोचकता की वकालत नहीं करते थे।उपन्यास में यथार्थवाद और यथार्थवाद का संगठना....

Subscribe Now

पूछताछ करें