अरुण कमल

अरुण कमलकुछ कविताएँ

१.
मैं लिख रहा हूँ निगरानी में
वे देख रहे हैं मुझको बनाते एक एक हर्फ
मेरे दाहिने कंधे को हिलते
मेरा झुका माथा
मैं उनकी निगरानी में लिख रहा हूँ

पर वे नहीं जानते कि अगर मैं लिख रहा हूँ दिन
तो उसका मतलब रात है
अगर लिखता हूँ जिन्दगी तो मतलब है
मौत
कोई नहीं जानता क्या सोच रही है मेरी आत्मा
पानी भी नहीं जानता मछलियाँ क्या सोच रही हैं
आसमान भी नह....

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