शैलजा पाठक

प्रेम में छली गई औरत... 

ये सुबह से रात तक 
ये इस बात से उस बात तक
तुम बोलती कम रोती ज्यादा हो
तुम जानती हो कुछ है ही नही कहने को

मैं हूँ तो सही साथ
पर तुम्हारे आँसू में मेरे हाथ नमक हुए जा रहे 

हम ही क्यों ठगे गए?
हमारा ही दिल क्यों तोड़ा?
मैंने क्या बिगाड़ा था ?

प्यार में ईमानदारी
दूसरे की सहूलियत बन जाती है मेरी दोस्त! Subscribe Now

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