एस.यू. जफर

जुनूं का जि़क्र बरा-ए-मलाल---

जुनूं का जि़क्र बरा-ए-मलाल करती है।
हमारी वेह्शत-ए-दिल भी कमाल करती है।।

कभी-कभी तो हंसी की शदीद1 ख़्वाहिश भी।
हमारे जिस्म को कितना निढाल करती है।।

कोई यहां पे शिकम2 सेर हो के खाता है।
किसी की भूक अभी तक खिलाल करती है।।

तमाम रात बरसता है खून आंखों से।
मगर ये रात कहां अर्ज़-ए-हाल करती है।।

Subscribe Now

पूछताछ करें