जगदीश्वर चतुर्वेदी

देरीदा , प्रतिवाद और आलोचना 

हिंदी आलोचना में आलोचना के नाम पर विवरण,ब्यौरे,कृति का सार-संक्षेप,परिचयात्मक पुस्तक समीक्षा और प्रशंसा खूब छप रही है। इसे ही आलोचना कहा जा रहा है।इस बहाने आलोचना में से ‘विश्लेषण’ को बहिष्कृत कर दिया गया है या फिर आलोचकों ने चरित्र,स्थिति और यथार्थ के ‘विश्लेषण’ के काम को बंद कर दिया है। ‘विश्लेषण’ के बिना आलोचना विकसित नहीं होती।इससे आलोचना में ‘प्रतिवाद....

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