नीरज नीर

दर्द न जाने कोई

बरसात के बाद नदी जब अपना पानी समेटती है तो कुछ पानी किनारे के गड्डों में छोड़ती चली जाती है। मुख्य धारा से पीछे छूट गया पानी भी बहना चाहता है। वह तड़पता है सागर से मिलन के लिए। पर सभी की किस्मत में सागर की नमकीन लहरों पर खेलना नहीं होता है। कुछ की किस्मत में गरम धूप की सीढि़यां चढ़ते हुए ऊपर बादलों में गुम हो जाना लिखा रहता है। लेकिन यह सब भूल कर गड्डों में फंसा पानी मछलियों ....

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