उस्मान

इलाहाबाद डायरी से

 

भट्ट साहब बड़े ‘लल्लन टाप’ आदमी थे, मुझ पर उनकी असीम कृपा थी। मुझसे ज्यादा सम्भवतः किसी पर भरोसा नहीं करते थे। और हमने भी उनकी चर्चा कभी किसी से नहीं की। अपनी महिला मित्रें की चर्चा मुझसे खुलकर करते थे। उनके इस विकट वाक-चातुर्य को, मैं ‘साष्टांग प्रणाम’ करता था।

मैं उनसे कहता, ‘महाराज’ तनी ई, कौशल हमें भी सिखा दो। भट्ट साहब गंभीर हो ....

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