महाभूत चंदन राय

या अल्लाह हे राम

 

अल्लाह मियां खैर करे! न जाने कहां जाकर ठहरेगी इस दुनिया की आबादी। ज़मीन तो बची ही नहीं रहने के लिए। कमबख़्त आसमान में सीढियां लगाये चढ़ी जा रही है ये दुनिया। ये ऊंची-ऊंची बिल्डिंगें, इमारतें, मुझे तो देखते ही चक्कर आतें हैं। मुई जाने कब हम पर भरभरा कर गिर पड़ें। मुझे तो ख़ब्त होती हैं इनसे। तुम भी न अम्मीजान! कमाल करती हो! दुनिया है की चांद पर डेरा डालने की त....

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