नवनीत मिश्र

मेरी जैसियां

 

जब से यहां लाई गई हूं तब से यही एक लाइन मन में चल रही है। वैसे काम तो मैेंने फांसी पाने लायक ही किया था। पुराना समय होता तो अब तक इस धरती से मेरा नामोनिशां मिट चुका होता लेकिन फांसी अब दी ही कहां जाती है, लिहाजा उम्रकैद ही अब मेरा नसीब है। वैसे ये बात मैंने कोर्ट में जज साहब से भी कही थी और किसी के भी सामने कह सकती हूं कि मुझे अपने किए का कोई पछतावा नहीं है। जब ब....

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