नीतीश मिश्र

जब भी जिंदगी पंतग की
मानिंद हवा में उड़ती है
मैं उदास होकर अपनी 
बौद्धिकता उतार कर फेंक देता हूं
और मृत्यु को धागे की 
तरह हाथ में लेकर 
जीवन को और सरल करता हूं
मृत्यु के बारे में सोचना 
उतना ही आसान है 
जितना कपास के 
फूल के बारे में सोचना
मैं अक्सर अंधेरे में 
तुम्हारा एक स्केच बनाता हूं
और उसमें उम्मीद का 
सप्तरंगी रंग भरता हूं
हवा में कुछ शब्....
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