नीलोत्पल रमेश

सत्ता के लिए मुसीबत

दिशाएं 
अपने-आप पर 
हैं आश्चर्य चकित
कि यह सब कैसे हो गया!
कि ऐसा तो होना 
ही नहीं चाहिए था!
कि एक साथ इतनी 
लड़कियों पर जुल्म! 
बाप रे!
भारत-भाग्य-विधाता 
क्या सो गए हैं?
लड़कियां 
चुपचाप कर रही थीं प्रतिरोध 
कि डंडे बरस पड़े 
एकाएक आसमान से 
नहीं-नहीं 
दिशाओं के अपने हाथ हो गए हैं 
जिन्हें अदृश्य शक्तियां 
बरस....

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