शैलेय

संवार

धीरे-धीरे 
बड़े होने के साथ ही 
खुलती गई मुट्ठियां
हथों ने थाम लिये हाथ
संवर गया जीवन।
---

बुरांस


हांलाकि 
यह एक भरा-पूरा जनसमूह है
किंतु यहां भी
हर कोई अपने-अपने में अकेला
हर किसी के हैं कई-कई फाड़

क्यों करें
रात के दौरान
उसे नींद नहीं आती और
दिन में
वैसे भी कौन अपने में रहा है---

Subscribe Now

पूछताछ करें