ज्योति त्रिपाठी

प्राथमिकता

मैं कभी किसी की प्राथमिकता 
नहीं रही सदैव विकल्पों-सा 
चयनित हुई। हां विकल्पों में 
सदैव प्रथम पाया खुद को 
मेरे अलावा विकल्प की सूची 
सूनी ही रही। मैंने विकल्पों में 
श्रेष्ठ माना स्वयं को।

मैं कभी विशेष न रही 
किसी के लिए 
बस शेष ही स्वीकार्य हुई।
हां शेष में हमेशा सराहा गया 
मुझको मेरे सिवा कभी कुछ न रह
पाता शेष मै....

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